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  1. गामक खेत, नदी आ ओ आमक फूलवारी
    खेतक कदवा, गँजार आ कुमरौरी, अदौरीकेँ तरकारी
    मरुवाकेँ रोटी आ मारा माछक चहटगर चटनी
    रौद कोन पानि कोन सभमे गीत गाबि कए खटनी
    फूलवारी महँक मचान, ताहिपर तासक विश्व कपकेँ घमासान
    महन्थ थानपर गप्प सरक्काकेँ लागल ओ साँझ भोरक दोकान
    गाछ, वृक्ष, पोखरि, झाँखरि आइ सभ मोन पडैत अछि
    नै जानी किए शहरमे रहितो नजरि ओहने बात तकैत अछि

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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