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  1. अप्पन हियसँ आइ हटा देलक ओ
    शोणित केर नोर कना देलक ओ

    हमरा बिनु रहल कखनो नै कहियो
    देखू आइ लगसँ भगा देलक ओ

    सपना जे सजैत रहै जिनगीकेँ
    सभटा पानिमे कऽ बहा देलक ओ

    हम बुझलौं गुलाब जँका जकरा नित
    से हमरे बताह बना देलक ओ

    भेटल नै इलाज कतौ कुन्दनकेँ
    एहन पैघ दर्द जगा देलक ओ

    मात्राक्रम: 2221-21-12222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. देह जखने पुरान बनल यौ
    स्थान तखने दलान बनल यौ

    आङ घटलै उमेर जँ बढलै
    देश दुनियाँ विरान बनल यौ

    सोह सुरता रहल कखनो नै
    आब नाजुक परान बनल यौ

    अस्त होइत सुरूज जकाँ बुझि
    राज सेहो अकान बनल यौ

    रीत छी याह जीवनकेँ सत
    सोचि कुन्दन हरान बनल यौ

    मात्राक्रम: 2122-121-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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