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  1. गजल

    Saturday, January 31, 2015

    आब सहब नै दाबन ककरो
    जोर जुलुम आ चापन ककरो

    गेल जमाना क्रूरक सभकेँ
    घर त हमर छल आसन ककरो

    भेल बहुत जे भेलै काइल
    लोक सुनै बस भाषण ककरो

    पूत मधेसक छी अभिमानी
    सहि कऽ रहब नै शोषण ककरो

    दर्द विभेदक भारी कुन्दन
    माथ हमर अछि चानन ककरो

    मात्राक्रम : 2112-222-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. हे शारदे दिअ एहन वरदान
    हो जैसँ जिनगी हमरो कल्याण

    पूजब सदति हे माए बनि पूत
    अपना शरणमे दिअ हमरा स्थान

    निष्काम हो मोनक सभ टा आश
    सुख शान्ति आ जगमे दिअ सम्मान

    जिनगी समाजक लागै शोकाज
    हमरा बना दिअ तेहन गुणवान

    लिअ प्रार्थना कुन्दनकेँ स्वीकारि
    बल वुद्धि विद्या आ दिअ ने ज्ञान

    मात्राक्रम : 2212-222-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. गजल

    Friday, January 16, 2015

    तोरा आदर कि केलियौ तूँ त हमरा सस्ता बुझि लेलही
    बस अपनाकेँ गुलाब हमरा सुखल सन पत्ता बुझि लेलही

    मोनक कुर्सी कि देलियौ बैस तोरा एके छन लेल हम
    हमरे जिनगीक तूँ अपन राजनीतिक सत्ता बुझि लेलही

    गजलक गंभीरता मधुरता असलमे तोरा की मालूम
    हमरा शाइर त बात दूरक अपन तूँ भगता बुझि लेलही

    शारीरिक हाउ भाउ तोहर बुझाइत रहलहुँ एना सदति
    जेना नेहक रहै पहिल बेर हमरे खगता बुझि लेलही

    नै छै जै मोनमे रहल चाह नेहक कोनो कुन्दन हमर
    तै मोनसँ हम किएक जोडब अधूरा नाता बुझि लेलही

    मात्राक्रम : 22221-212-2122-222-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. गजल

    Saturday, January 3, 2015

    साँचमे शायद ओ नै चाहैत रहै
    मोन झुठ्ठे सदिखन पतिआबैत रहै

    फुलि हमर आगू ओ सुन्नर फूल जकाँ
    बाग पाछू अनकर गमकाबैत रहै

    हम हियामे बैसेलहुँ बुझि नेह अपन
    तेँ सदति हमरा ओ तड़पाबैत रहै

    साँच नेहक दुनियामे अछि मोल कहाँ
    लोक जैमे जिनगी बीताबैत रहै

    जाइ छल मन्दिर नित कुन्दन संग मुदा
    प्राथनामे दोसरकेँ माँगैत रहै

    मात्राक्रम : 212-222-2221-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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