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  1. भक्ति गजल

    Monday, October 22, 2018

    हे जया जगदम्बा जगतारिणी कि जय हो
    भगवती कल्याणी भयनाशिनी कि जय हो

    कष्ट मोचक कामाक्षी जग सुखस्वरुपा
    दुर्गपारा देवी दुखहारिनी कि जय हो

    सिंहपर अासित मैया मातृका भवानी
    कामिनी व्रह्मा वरदायिनी कि जय हो

    इन्द्र दुखमे पुजलक परमेश्वरी अहींके
    देव रक्षक अजिता कात्यायिनी कि जय हो

    नाम जपलापर भक्तक मृत्यु जाइ छै टरि
    शैलपुत्री कालक संहारिनी कि जय हो

    रहि हृदयमे कुन्दनपर नित करब करुणा
    प्रार्थना अछि र्इ पशुपति भामिनी कि जय हो

    212-222-2212-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. गजल

    Tuesday, July 24, 2018

    देश भरि कहादन रेल चलतै आब
    फेर किछु विकासक खेल चलतै आब

    थालमे धमाधम पीच करतै बाट
    टोल-टोल हेलम हेल चलतै आब

    कामकाज हेतै सारहे बाईस
    योजनाक खातिर झेल चलतै आब

    बुद्धिमान सब बेहोश जेना भेल
    राजकाजमे बकलेल चलतै आब

    नागरिकसँ उप्पर छै बनल सरकार
    लोकतन्त्र ककरा लेल चलतै आब

    राजनीतिमे कुन्दन बढल अपराध
    जन जनारदनके जेल चलतै आब

    212-122-212-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. गजल

    Thursday, June 28, 2018

    दर्दके सेहो ई दर्द दर्दनाक बुझाइ छै
    लोक छै किछु जकरा लेल सब मजाक बुझाइ छै

    एक छनमे बन्हन तोड़ि गेल बात बनाक ओ
    आब नाता हमरो सूतरीक टाक बुझाइ छै

    सोझके दुनियामे के पुछै समाज जहर बनल
    नैन्ह टा बच्चा आ बूढ़ सब चलाक बुझाइ छै

    धुंइया जोरक उठलै पड़ोसियाक दलानमे
    रचयिता एहन षड्यंत्र केर पाक बुझाइ छै

    मोंछ पर तेजी ओकीलबा घुमाक दएत छै
    कचहरीके मुद्दामे बढल तलाक बुझाइ छै

    2122-2221-2121-1212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. गजल

    Tuesday, June 19, 2018

    जुआनीके पहिल उत्सव मनेलौं हम
    हियामे ओकरा जहिया बसेलौं हम

    सुरुआते गजब छल सोलहम बरिसक
    अचानक डेग यौवन दिस बढेलौं हम

    उचंगाके कमी नै टोलमे कोनो
    नजरि मिलिते इशारामे बजेलौं हम

    गवाही चान तारा छै पहिल मिलनक
    कलीके संग भमरा बनि फुलेलौं हम

    असानी छै कहाँ टिकनाइ नेही बनि
    समाजक रीतमे शोणित बहेलौं हम

    कलम कापी किताबक कोन बेगरता
    जखन इतिहासमे प्रेमी लिखेलौं हम

    चिरै सन मोन ई उड़िते रहल कुन्दन
    असम्भवपर किए असरा लगेलौं हम

    बहरे-हजज (1222×3)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  5. गजल

    Wednesday, May 30, 2018

    की कहू मोनमे किछु फूराइत नै अछि आइ काइल
    ओकरा छोड़ि केओ सोहाइत नै अछि आइ काइल

    मोहिनी रूप ओकर केलक नैना पर कोन जादू
    चेहरा आब दोसर देखाइत नै अछि आइ काइल

    नेह जहियासँ भेलै हेरा रहलै सुधि बुधि दिनोदिन
    बात दुनियाक कोनो सोचाइत नै अछि आइ काइल

    शब्द जे छल हमर लग पातीमे लिखि सब खर्च केलौं 
    भाव मोनक गजलमे बहराइत नै अछि आइ काइल

    संग जिनगीक कुन्दन चाही ओकर सातो जनम धरि
    निन्नमे आँखि आरो सपनाइत नै अछि आइ काइल

    2122-1222-2222-2122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  6. गजल

    Friday, May 18, 2018

    ओकर संग ई जिनगीक असान बना देलक
    सुख दुखमे हृदयके एक समान बना देलक

    बुढ़हा गेल छल यौ बुद्धि विचार निराशामे
    ज्ञानक रस पिआ ओ फेर जुआन बना देलक

    अध्यात्मिक जगतके बोध कराक सरलतासँ
    हमरा सन अभागल केर महान बना देलक

    चाहक ओझरीमे मोन हजार दिशा भटकल
    अध्ययनेसँ तृष्णा मुक्त परान बना देलक

    अष्टावक्र गीता लेल विशेष गजल कुन्दन
    कहितेमे हमर मजगूत इमान बना देलक

    2221-2221-121-1222

    (तेसर शेरक पहिल मिसराक अन्तिम 
    लघुके दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  7. Thursday, April 26, 2018

    तस्वीर: भोरूकवा (Sunshine)
    अार्ट: कुन्दन कुमार कर्ण

    Sunshine
    By: Kundan Kumar Karna



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  8. गजल

    Monday, April 23, 2018

    तोरा बिना चान ताराक की मोल
    रंगीन संसार साराक की मोल

    अन्हारमे जे हमर संग नै भेल
    दिन दूपहरिया सहाराक की मोल

    चुप्पीक गम्भीरता बुझि चलल खेल
    लग ओकरा छै इशाराक की मोल

    संवेदना सोचमे छै जकर शुन्य
    नोरक बहल कोन धाराक की मोल

    अपने बना गेल हमरा जखन आन
    कुन्दन कहू ई विचाराक की मोल

    221-221-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  9. गजल

    Sunday, April 8, 2018

    केओ सम्मानक भूखल 
    केओ पकवानक भूखल

    अपने आकांक्षा खातिर
    पण्डा भगवानक भूखल

    करनी धरनी छाउर सन
    नेता गुनगानक भूखल

    धरतीपर चल' नै जानै
    कवि छथि से चानक भूखल

    अपना चाहे जे किछु हो
    अनकर नुकसानक भूखल

    संतुष्टी सपना लोकक
    सब अनठेकानक भूखल

    22-222-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  10. गजल

    Monday, March 5, 2018

    अस्तित्वमे अस्तित्व समा जेतै एक दिन
    अपनाक अपने संग मिला जेतै एक दिन

    बिनु शब्द आ संगीत मिलनके बेर प्रकृति
    शुन्ना समयमे गीत सुना जेतै एक दिन

    नै हम रहब नै देह रहत रहतै बोध टा
    दुख दर्द सब जिनगीक परा जेतै एक दिन

    मस्तिष्कके सुख दुखसँ उपर लेबै जे उठा
    आनन्दमे र्इ मोन डुबा जेतै एक दिन

    बहिते हृदयमे जोरसँ कुन्दन नेहक हवा
    चैतन्य केर ज्ञात करा जेतै एक दिन

    2212-221-1222-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  11. बाल गजल

    Saturday, February 10, 2018

    पापा यौ चकलेट खेबै
    कनिये नै भरिपेट खेबै

    छुछ्छे कोना नीक लगतै
    नमकिन बिस्कुट फेंट खेबै

    हमहीं टा नै एसगर यौ
    संगी सभके भेंट खेबै

    मानब एके टासँ नै हम
    पूरा दू प्याकेट खेबै

    कुन्दन भैया आबि जेथिन
    बांकी ओही डेट खेबै

    222-221-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  12. बाल गजल

    Saturday, February 3, 2018

    बौआ हमर छै बुधिआर
    लोकक करै छै सत्कार

    ज्ञानी जकाँ कनिये टासँ
    माएसँ सिखलक संस्कार

    संगी बना ओ पोथीक
    मानै कलमके संसार

    खाना समयपर खेलासँ
    देखू बनल छै बौकार

    हँसिते रहल सदिखन खूब
    मुस्कान देलक उपहार

    कुन्दनसँ खेलाइत काल
    जितबाक केलक जोगार

    बहरे - मुन्सरह

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  13. गजल

    Friday, January 19, 2018

    कोनो दर्दमे आइ धरि मिठास नै छल
    भरिसक मोनमे प्रेमिकाक बास नै छल

    मिलिते नैन तोरासँ ठोर बाजि उठलै
    अनचिन्हारके टोकितों सहास नै छल

    सुन्नरताक संसारमे कमी कहाँ छै
    आरो लेल केने हिया उपास नै छल

    नेहक लेल भेलौं बताह नै तँ कहियो
    जिनगी एहि ढंगक रहल उदास नै छल

    प्रियतम बिनु जुआनी कटति रहै अनेरो
    लागल जोरगर चाहके पिआस नै छल

    यौवन देखलौं सृष्टिमे अनेक कुन्दन
    एहन पैघ भेटल कतौं सुवास नै छल

    2221-2212-121-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  14. गजल

    Tuesday, January 9, 2018

    नै उलहन कोनो नै उपराग तोरासँ
    भरिसक बनतै दोसरके भाग तोरासँ

    जियबै जिनगी हम माली बनिक' भमरासँ
    सजतै ककरो मोनक जे बाग तोरासँ

    पूरा हेतै से की सपनाक ठेकान
    अभिलाषा छल जे सजितै पाग तोरासँ

    तोंही छलही सरगम शुर ताल संगीत
    छुछ्छे आखर रहने की राग तोरासँ

    मेटा लेबै कुन्दन दुनियासँ अपनाक
    रहतै जिनगीमे नै किछु दाग तोरासँ

    222-222-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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