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  1. बाल गजल

    Tuesday, May 12, 2020

    हमर सुन्नर गाम छै
    फरल ओतऽ आम छै

    विपतिमे संसार यौ
    प्रकृति जेना बाम छै

    निकलि बाहर जाउ नै
    बिमारी सब ठाम छै

    सफा आ स्वस्थ्य रहब
    तखन कोनो काम छै

    जनककें सन्तान हम
    जनकपुर सन धाम छै

    अयोध्या छै घर जकर
    तकर नाओ राम छै

    कलम किनि दिअ ने लिखब
    बहुत सस्ता दाम छै

    मफाईलुन-फाइलुन

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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