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  1. गजल

    Tuesday, June 23, 2020

    कर्कट बथुवा सब नामी छै ऐठां
    गुनधुन नै जकरो धामी छै ऐठां

    नारीकें पूजा ढाँढस मन्दिरमे 
    असलीमे नर सब कामी छै ऐठां

    जै क्षेत्रक बुधि नै तै पर दै व्याख्या
    बिनु मामा बहुते मामी छै ऐठां

    बूझत सम्झत सोचत के की किछुओ
    अनकर डेगे अनुगामी छै ऐठां

    चुप्पे रहबै कुन्दन जिनगी भरि हम
    साँचो बाजब बदनामी छै ऐठां

    22-22-22-22-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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