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  1. दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना
    चोट नेहसँ भरल ई सहब हम कोना

    छोडि हमरा जखन दूर रहबै सजनी
    भावमे बिनु मिलनकेँ बहब हम कोना

    संग देबै अहाँ नै जँ सुख आ दुखमे
    एहि संसारमे यौ रहब हम कोना

    ठोरपर एसगर नव हँसीकेँ मोती
    दूर रहि–रहि विरहमे गहब हम कोना

    सोचि कुन्दन रहल जीविते जिनगी अछि
    अंचियापर अहाँ बिनु डहब हम कोना

    मात्रात्रम : 2122-122-12222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. दुख अपने लग राखै छी
    सुख सभमे हम बाँटै छी

    सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन
    हँसि-हँसि जिनगी काटै छी

    पापसँ रहि अलगे बलगे
    धर्मक गीतल गाबै छी

    मैथिल छी सज्जन छी हम
    मिठगर बोली बाजै छी

    कुन्दन सन गुण अछि हमरा
    मिथिलाकेँ चमकाबै छी

    मात्राक्रम : 2222-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. बीतल दिन जखन मोन पडै छै
    आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै

    छोडब नै कहै संग अहाँकेँ
    लग नै आउ से आब कहै छै

    ओकर देलहा चोटसँ छाती
    एखन धरि हमर दर्द करै छै

    जिनगीमे लगा गेल पसाही
    धधरामे हिया कानि जरै छै

    के बूझत दुखक बात हियाकेँ
    कुन्दन आब कोना कँ रहै छै

    मात्राक्रम : 222-1221-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ
    आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ

    संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै
    अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ

    फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित
    डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ

    हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम
    चलबै आगू बाधा केर टाटसँ

    बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ
    चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ

    मात्राक्रम: 2222-2221-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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