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गजल: जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या

जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या हियामे चोट आ बदनमे आगि लगा चलि या छियै हम ठाढ़ एहि पार सात समुन्दरकें हियामे प्रेम छौ त आइ पानि सुखा चलि या जरै हमरासँ लोकवेद हार हमर देखि भने हमरा हराक सभकें‌ फेर जरा चलि या बरेरी पर भऽ ठाड़ हम अजान करब प्रेमक समाजक डर जँ तोरा छौ त सभसँ नुका चलि या जमाना बूझि गेल छै बताह छियै हमहीं समझ देखा कनी अपन सिनेह बचा चलि या 1222-1212-12112-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

हेलो मिथिलामे गजल प्रस्तुति

24 अप्रिल, 2016 लोकप्रिय मैथिली कार्यक्रम हेलो मिथिलामे संचालक एवं प्रसिद्ध साहित्यकार श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक संग कान्तिपुर एफ‍.एम.के स्टूडियोमे लेल गेल तस्वीर । कार्यक्रममे मैथिली गजलक विविध पक्षपर चर्चा परिचर्चा भेल ।