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नवंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक

मैथिली साहित्यिक गोष्ठी

काठमाण्डू, ०७ नोभेम्बर, २०१५  "वर्तमान राजनीतिक सन्दर्भ आ मैथिलीक भविष्य" विषय पर प्राज्ञ रमेश रञ्जन झा जीक अध्यक्षता आ प्रा.डा. राम अवतार यादव जीक प्रमुख आतिथ्यमे बालुवाटार, काठमाण्डूमे मैथिली साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न भेल अछि । कार्यक्रममे साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षि मन्तव्य व्यक्त करैत कहलनि जे राज्य मैथिलीप्रति सदति पूर्वाग्रही रहल अछि । तहिना प्रा.डा. राम अवतार यादव कहलनि जे मैथिली संकट अवस्थामे रहितो जीवित अछि । मैथिलीकेँ लेल कतेक काज केलहुँ से महत्वपूर्ण नै, काजक स्तरीयता महत्वपूर्ण हए छै । कार्यक्रममे रूपा झा, विजय दत्त, विनीत ठाकुर, श्याम शेखर झा लगायतकेँ सर्जक सभ अपन रचना प्रस्तुत केने छल । कार्यक्रमक ब्यवस्थापन निराजन झा एवं संचालन आ आयोजन कुन्दन कुमार कर्ण केने छल । कार्यक्रमक सम्पूर्ण विवरण तस्वीरमे