सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक

गजल

कर्ममे एना रमा जाउ संगी स्वर्गमे सिड़ही लगा जाउ संगी भेटलै ककरा कथी मेहनत बिनु बाट गन्तव्यक बना जाउ संगी नै घृणा ककरोसँ नै द्वेष राखू नेह चारु दिस बहा जाउ संगी चित्तमे सुनगत अनेरो जँ चिन्ता धूँइयामे सब उड़ा जाउ संगी ठेस लागल ओकरे जे चलल नित डेग उत्साहसँ बढा जाउ संगी किछु करु हो जैसँ कल्याण लोकक नाम दुनियामे कमा जाउ संगी ओझरी छोड़ाक जिनगीक आबो संग कुन्दनके बिता जाउ संगी फाइलुन–मुस्तफइलुन–फाइलातुन © कुन्दन कुमार कर्ण

Poem : I like you

You can't imagine My intrinsic sensation The wave of your desire Is on fire Every breath I take Every move I make You always with me I wish you would have known The story of my discomfort The State of my loneliness But, What can I do Now that My heart isn't in control of itself Then How to win your heart Perhaps It's impossible for me But nevertheless I'm looking to continue This series of affection Without your any action Even I don't know Whatever you are Good or bad Honest or mad I just know A thing about you From the bottom of my heart I like you I like you I like you © Kundan Kumar Karna

Ghazal

You stole my heart at a glance Picture source - google To enter in your heart, give me a chance Smiling is the first step to enter into heart So, pass this step within love circumstance My feeling and affection are inviting you I think these are all definitely acceptance Rainy is the season that exciting me My heart began to saw you dance and dance Darling, you hold me in your cool arm Come on and fall with me in romance © Kundan Kumar Karna

Ghazal

My heart is on fire Because of your desire Forgone is the food Forgotten are attire You are the pearl And the golden sapphire Aspires all the senses To make it square Affection continues for sure Till the moment of pyre Love addicts in my vein Going to be higher I am incomplete soul Only you can make me entire If I get you for forever Then what else is the require These words are my feelings Don't understand fake admire [couplets 2,3,4 and 5 are created by Rajeev Ranjan Mishra sir and remaining by me]

बाल गजल

फूल पर बैस खेलै छै टिकली डारि पर खूब कूदै छै टिकली Picture - www.google.com भोर आ साँझ नित दिन बारीमे गीत गाबैत आबै छै टिकली लाल हरिअर अनेको रंगक सभ देखमे नीक लागै छै टिकली पाँखि फहराक देखू जे उडि-उडि दूर हमरासँ भागै छै टिकली नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया आब जेनाक नाचै छै टिकली मात्रक्रम : 212-2122-222 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल

जनतन्त्रमे जन राज्यसँ डेरा रहल छै                                     अपने चुनल सरकारसँ पेरा रहल छै कानूनमे अधिकार मुदा काजमे नै स्वतन्त्रता अभ्याससँ हेरा रहल छै ठेकान नै कुर्सीक कखन के लऽ जेतै सत्ताक भागी जल्दिसँ फेरा रहल छै अन्याय अत्याचारसँ पीडित गरीबे नेताक चक्रव्यूहसँ घेरा रहल छै ककरासँ जनता आब करत कोन उल्हन रक्षक सभक बन्दूकसँ रेरा रहल छै सेनूर मेटा गेल कतेकोक कुन्दन सरकार नै लोकसँ टेरा रहल छै 2212-221-122-122 © कुन्दन कुमार कर्ण www.kundanghazal.com

चर्चा परिचर्चा

हम नै आलोचक छी । नै समालोचक छी । आ हुनका सभहँक जागिर सेहो छिनऽ नै चाहै छी । तथापि एकटा सर्जककेँ हिसाबसँ मैथिल साहित्यक चर्चित नाऔं सियाराम झा 'सरस' जीक लिखल गजल संग्रहपर संक्षेपमे आइ किछु चर्चा करऽ चाहब । तँ पहिने सरला प्रकाशनद्वारा सन् 1989 मे प्रकाशित कएल गेलह हुनक गजल संग्रह "शोणितायल पैरक निशान"के देखि- एहि संग्रहमे कुल ४८टा गजल छै । जकरा आजाद गजलक श्रेणीमे राखि पढल जा सकैछ । किछु गजल भावक दृष्टिकोणे तँ महत्वपूर्ण छहिए किछु शेर सेहो हृदयकेँ छूअवला छै । जेना बतीसम् गजलक ई मतला देखू- फूलवन मे एक भँवरा युग युग सँ रहए पियासल जनु भोजक खास भडारी रहि जाय निखण्ड उपासल पोथीमे 'गजले किएक ?' विषयपर 6 पेज खर्च कए लिखल गेल छै मुदा 'गजले किएक ?' तकर तथ्यपरक तर्क नै भेट सकल । बहरक निर्वहन तँ दूरक बात संग्रहक अधिकांश गजलमे गजलक आधारभुत निअम पालन नै कएल गेल छै । जेना गजल संख्या 2, 3, 8, 11, 14, 15, 18, 21, 23, 24, 25, 26, 27, 30, 35, 36, 45, 46, 47, 48 लगायतके गलजमे काफिया दोष तँ छहिए, बहुत रास गजलमे काफिया आ रदिफक ठेकान नै । ढेर रास शेरकेँ अर्थ सेहो अस्पष्ट बुझाइ

गजल

बिनु पुछने हृदयसँ ककरो लगाबऽ चलल छलौँ हम अनचिन्हार गाममे घर बनाबऽ चलल छलौँ हम कारोबार एहि जिनगीक सुखसँ चलाबऽ खातिर नेहक लेल मोल अपने घटाबऽ चलल छलौँ हम चिन्हब लोककेँ कठिन अछि भरमसँ भरल जगतमे बुझि कांटेक फूल हियामे सजाबऽ चलल छलौं हम अपनो छाहपर जखन नै भरोस रहल मनुषकेँ दोसरकेँ तखन हियामे बसाबऽ चलल छलौं हम भगवानक दयासँ कुन्दन कपार हमर सही छल अपने घेंचकेँ अनेरो कटाबऽ चलल छलौं हम 2221-2122-12112-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

हेलो मिथिलामे गजल प्रस्तुति

24 अप्रिल, 2016 लोकप्रिय मैथिली कार्यक्रम हेलो मिथिलामे संचालक एवं प्रसिद्ध साहित्यकार श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक संग कान्तिपुर एफ‍.एम.के स्टूडियोमे लेल गेल तस्वीर । कार्यक्रममे मैथिली गजलक विविध पक्षपर चर्चा परिचर्चा भेल ।

गजल

Tirhuta Lipi

गजल

रे हिया हमरा एतेक मजबूर नै कर चाहमे ककरो हमरेसँ तूँ दूर नै कर एकटा कित्ता अछि मोन सौँसे हमर ई बाँटि टुकड़ी-टुकड़ीमे अलग धूर नै कर काँच कोमल आ नवका जुआनी चढल छै आगि यादक यौवनमे लगा घूर नै कर एक त प्रेमक खातिर पिआसल रहै छी ताहि पर आरो उकसाक आतूर नै कर भागमे ककरा कुन्दन लिखल सब रहै छै कल्पनामे डुबि एना मोनके झूर नै कर 212-2222-122-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

अन्तरवार्ता - रेडियो नेपाल

22 फरवरी, 2016 के रेडियो नेपालमे प्रत्यक्ष प्रसारित हमर अन्तरवार्तासँ सम्बन्धित किछु चित्र