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गजल : देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै

देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै लोकतन्त्रेमे कलम कमजोर भेल छै ककरा पर करतै भरोसा आमलोक सब कुर्सी पबिते सैह देखू चोर भेल छै बस्ती बस्ती छै चलल परिवर्तनक लहरि आइ शोणित लोककें इन्होर भेल छै एक टा सब्जी कते दिन खाइते रहत नव सुआदक लेल लोकक जोर भेल छै चान‌ दिस ताकै गगनमे आब के कहू दूरभाषे यन्त्र मनुषक खोर भेल छै ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽ - ।ऽ © कुन्दन कुमार कर्ण Kundan Kumar Karna

भक्ति गजल

हे जया जगदम्बा जगतारिणी कि जय हो भगवती कल्याणी भयनाशिनी कि जय हो कष्ट मोचक कामाक्षी जग सुखस्वरुपा दुर्गपारा देवी दुखहारिनी कि जय हो सिंहपर अासित मैया मातृका भवानी कामिनी व्रह्मा वरदायिनी कि जय हो इन्द्र दुखमे पुजलक परमेश्वरी अहींके देव रक्षक अजिता कात्यायिनी कि जय हो नाम जपलापर भक्तक मृत्यु जाइ छै टरि शैलपुत्री कालक संहारिनी कि जय हो रहि हृदयमे कुन्दनपर नित करब करुणा प्रार्थना अछि र्इ पशुपति भामिनी कि जय हो 212-222-2212-122 © कुन्दन कुमार कर्ण