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सितंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

प्रदेश-2 में फिर उपजा भाषा विवाद (हिन्दी अनुवाद)

केंद्र में सरकार बदलने से प्रदेश 2 भी अछूता नहीं रहा। परिणामस्वरूप, एक मंत्री और एक राज्य मंत्री के साथ नेकपा माओवादी (केंद्र) भी सरकार में शामिल हो गयी। माओवादी केंद्र की ओर से भरत साह ने आंतरिक मामला और संचार मंत्री के रूप में शपथ ली और रूबी कर्ण ने उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले दोनों मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने का स्टैंड लिया था। पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अफसोस जताया कि कानून में कमी के कारण वे अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ नहीं ले सके और कहा कि शपथ की भाषा पर असहमति के कारण शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई। लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने मातृभाषा में शपथ लेने पर अध्यादेश लाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोपहर तीन बजे दोनों मंत्रियों का शपथ ग्रहण होना था। लेकिन भाषा विवाद के चलते यह कार्यक्रम दोपहर 4 बजे शुरू हो सका। इनलोगों ने मैथिली भाषा में लिखा एक प्रतीकात्मक शपथ पत्र भी प्रदेश 2 के प्रमुख राजेश झा को सौंपा था। मातृभाषा मैथिली के प्रति प्रेम और स्नेह को लेकर प्रदेश 2 में चर्चा में आए मंत्री साह ने एक सप्ताह पहले एक कार्यक्

गजल - दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना

दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना चोट नेहक भरल ई सहब हम कोना छोडि हमरा जखन दूर रहबै सजनी भावमे बिनु मिलनकेँ बहब हम कोना संग देबै अहाँ नै जँ सुख आ दुखमे एहि संसारमे यौ रहब हम कोना ठोरपर एसगर नव हँसीकेँ मोती दूर रहि–रहि विरहमे गहब हम कोना सोचि कुन्दन रहल जीविते जिनगी अछि अंचियापर अहाँ बिनु चढ़ब हम कोना मात्राक्रम : 2122-1221-2222 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - दुख अपने लग राखै छी

दुख अपने लग राखै छी सुख सभमे हम बाँटै छी सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन हँसि-हँसि जिनगी काटै छी पापसँ रहि अलगे बलगे धर्मक गीतल गाबै छी मैथिल छी सज्जन छी हम मिठगर बोली बाजै छी कुन्दन सन गुण अछि हमरा मिथिलाकेँ चमकाबै छी मात्राक्रम : 2222-222 © कुन्दन कुमार कर्ण

कविता - चान (चौरचनकेँ सन्दर्भमे)

आइ असमञ्जसमे छी कोन चान देखू ? उप्परका की निचलका ? उप्परका छुछ्छे हाथ देखब त पाप जँ उप्परका देखब त कहीँ निचलका नै रूसि जाइ

गजल - जिनगी एक वरदान छी

गजल - बादलमे नुका जाइ छैक चान किए

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

बीतल दिन जखन मोन पडै छै आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै छोडब नै कहै संग अहाँकेँ लग नै आउ से आब कहै छै ओकर देलहा चोटसँ छाती एखन धरि हमर दर्द करै छै जिनगीमे लगा गेल पसाही धधरामे हिया कानि जरै छै के बूझत दुखक बात हियाकेँ कुन्दन आब कोना कँ रहै छै मात्राक्रम : 222-1221-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - हमरा देखिते ओ लजा गेलै

By - Kundan Kumar Karna

बाल गजल - पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ

पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम चलबै आगू बाधा केर टाटसँ बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ मात्राक्रम: 2222-2221-22 © कुन्दन कुमार कर्ण