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सितंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक

गजल - दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना

दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना चोट नेहक भरल ई सहब हम कोना छोडि हमरा जखन दूर रहबै सजनी भावमे बिनु मिलनकेँ बहब हम कोना संग देबै अहाँ नै जँ सुख आ दुखमे एहि संसारमे यौ रहब हम कोना ठोरपर एसगर नव हँसीकेँ मोती दूर रहि–रहि विरहमे गहब हम कोना सोचि कुन्दन रहल जीविते जिनगी अछि अंचियापर अहाँ बिनु चढ़ब हम कोना मात्राक्रम : 2122-1221-2222 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - दुख अपने लग राखै छी

दुख अपने लग राखै छी सुख सभमे हम बाँटै छी सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन हँसि-हँसि जिनगी काटै छी पापसँ रहि अलगे बलगे धर्मक गीतल गाबै छी मैथिल छी सज्जन छी हम मिठगर बोली बाजै छी कुन्दन सन गुण अछि हमरा मिथिलाकेँ चमकाबै छी मात्राक्रम : 2222-222 © कुन्दन कुमार कर्ण

कविता - चान (चौरचनकेँ सन्दर्भमे)

आइ असमञ्जसमे छी कोन चान देखू ? उप्परका की निचलका ? उप्परका छुछ्छे हाथ देखब त पाप जँ उप्परका देखब त कहीँ निचलका नै रूसि जाइ

गजल - जिनगी एक वरदान छी

गजल - बादलमे नुका जाइ छैक चान किए

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

बीतल दिन जखन मोन पडै छै आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै छोडब नै कहै संग अहाँकेँ लग नै आउ से आब कहै छै ओकर देलहा चोटसँ छाती एखन धरि हमर दर्द करै छै जिनगीमे लगा गेल पसाही धधरामे हिया कानि जरै छै के बूझत दुखक बात हियाकेँ कुन्दन आब कोना कँ रहै छै मात्राक्रम : 222-1221-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - हमरा देखिते ओ लजा गेलै

By - Kundan Kumar Karna

बाल गजल - पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ

पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम चलबै आगू बाधा केर टाटसँ बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ मात्राक्रम: 2222-2221-22 © कुन्दन कुमार कर्ण