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सितंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

गजल : देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै

देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै लोकतन्त्रेमे कलम कमजोर भेल छै ककरा पर करतै भरोसा आमलोक सब कुर्सी पबिते सैह देखू चोर भेल छै बस्ती बस्ती छै चलल परिवर्तनक लहरि आइ शोणित लोककें इन्होर भेल छै एक टा सब्जी कते दिन खाइते रहत नव सुआदक लेल लोकक जोर भेल छै चान‌ दिस ताकै गगनमे आब के कहू दूरभाषे यन्त्र मनुषक खोर भेल छै ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽ - ।ऽ © कुन्दन कुमार कर्ण Kundan Kumar Karna

गजल - दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना

दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना चोट नेहक भरल ई सहब हम कोना छोडि हमरा जखन दूर रहबै सजनी भावमे बिनु मिलनकेँ बहब हम कोना संग देबै अहाँ नै जँ सुख आ दुखमे एहि संसारमे यौ रहब हम कोना ठोरपर एसगर नव हँसीकेँ मोती दूर रहि–रहि विरहमे गहब हम कोना सोचि कुन्दन रहल जीविते जिनगी अछि अंचियापर अहाँ बिनु चढ़ब हम कोना मात्राक्रम : 2122-1221-2222 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - दुख अपने लग राखै छी

दुख अपने लग राखै छी सुख सभमे हम बाँटै छी सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन हँसि-हँसि जिनगी काटै छी पापसँ रहि अलगे बलगे धर्मक गीतल गाबै छी मैथिल छी सज्जन छी हम मिठगर बोली बाजै छी कुन्दन सन गुण अछि हमरा मिथिलाकेँ चमकाबै छी मात्राक्रम : 2222-222 © कुन्दन कुमार कर्ण

कविता - चान (चौरचनकेँ सन्दर्भमे)

आइ असमञ्जसमे छी कोन चान देखू ? उप्परका की निचलका ? उप्परका छुछ्छे हाथ देखब त पाप जँ उप्परका देखब त कहीँ निचलका नै रूसि जाइ

गजल - जिनगी एक वरदान छी

गजल - बादलमे नुका जाइ छैक चान किए

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

गजल - बीतल दिन जखन मोन पडै छै

बीतल दिन जखन मोन पडै छै आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै छोडब नै कहै संग अहाँकेँ लग नै आउ से आब कहै छै ओकर देलहा चोटसँ छाती एखन धरि हमर दर्द करै छै जिनगीमे लगा गेल पसाही धधरामे हिया कानि जरै छै के बूझत दुखक बात हियाकेँ कुन्दन आब कोना कँ रहै छै मात्राक्रम : 222-1221-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - हमरा देखिते ओ लजा गेलै

By - Kundan Kumar Karna

बाल गजल - पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ

पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम चलबै आगू बाधा केर टाटसँ बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ मात्राक्रम: 2222-2221-22 © कुन्दन कुमार कर्ण