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कविता : पराती

रंग विरंगक भास छलै गीत गबैत परात रहै भोर कहै शुभभोर सदा बड्ड मजा छल बड्ड मजा आब दलानक शान कहाँ बूढ़ पुरानक गान‌ वला इन्टरनेटक शासनमे संस्कृति खातिर सोचत के छन्द : सारवती (ऽ।। ऽ।। ऽ।। ऽ) Kundan Kumar Karna

बाल गजल - हाथी चलै बजार

हाथी चलै बजार कुत्ता भुकै हजार माए गे भूख लगलै चुल्हा कने पजार बनबै किसान करबै पप्पा जकाँ गजार कागतके घर बनेलौं तकरो तूँ नै उजार ऽऽ।ऽ - ।ऽऽ

कविता - हम आधुनिक समाज छी

हम आधुनिक समाज छी हमरामे नै चेतना रहलै नै दशर्न रहलै नै अध्ययन रहलै सब किछु बिसरि गेल छी हम त मरि गेल छी कविता

हिन्दी फिल्मक गीतमे बहर

गीत - अगर मुझ से मुहब्बत है...... फिल्म - आप की परछाइयां (१९६४) गीतकार - राजा मेहदी अली खान गायिका - लता मंगेश्वर संगीतकार - मदन‌ मोहन‌ 1222 - 1222 - 1222 - 1222 (बहर - हजज मुसम्मन सालिम) अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो इन आँखों का हर इक आँसू मुझे मेरी क़सम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है....... तुम्हारे ग़म को अपना ग़म बना लूँ तो क़रार आए तुम्हारा दर्द सीने में छुपा लूँ तो क़रार आए वो हर शय जो तुम्हें दुःख दे मुझे मेरे सनम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है........ शरीक ए ज़िंदगी को क्यूँ शरीक-ए-ग़म नहीं करते दुखों को बाँट कर क्यूँ इन दुखों को कम नहीं करते तड़प इस दिल की थोड़ी सी मुझे मेरे सनम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है....... इन आँखों में ना अब मुझको कभी आँसूँ नज़र आए सदा हँसती रहे आँखें सदा ये होंठ मुस्काये मुझे अपनी सभी आहें सभी दर्द ओ अलम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो इन आँखों का हर इक आँसू मुझे मेरी क़सम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है..... तक्तीअ अगर मुझसे/ मुहब्बत है/ मुझे सब अप/ ने ग़म दे दो इनाँखों का/ हरिक आँसू/ मुझे मेरी/ क़सम दे दो तुम्हारे ग़म/ को अपना ग़म/ बना लूँ तो/ क़रारा