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गजल : देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै

देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै लोकतन्त्रेमे कलम कमजोर भेल छै ककरा पर करतै भरोसा आमलोक सब कुर्सी पबिते सैह देखू चोर भेल छै बस्ती बस्ती छै चलल परिवर्तनक लहरि आइ शोणित लोककें इन्होर भेल छै एक टा सब्जी कते दिन खाइते रहत नव सुआदक लेल लोकक जोर भेल छै चान‌ दिस ताकै गगनमे आब के कहू दूरभाषे यन्त्र मनुषक खोर भेल छै ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽ - ।ऽ © कुन्दन कुमार कर्ण Kundan Kumar Karna

एक अशआर

जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या हियामे चोट आ बदनमे आगि लगा चलि या छियै हम ठाढ़ एहि पार सात समुन्दरकें हियामे प्रेम छौ त आइ पानि सुखा चलि या Kundan Kumar Karna

भूमिका एक, फाँक अनेक: कथित गजल संग्रह 'आबि रहल एक हाहि'कें आलोचना

1 लूरि किछुओ सीख ले नहि सदति अंदाज कर ( शाइर-बाबा बैद्यनाथ, मात्राक्रम-2122-212 ) रचनाकारक तौरपर हम ई मानै छी जे कोनो रचना नीक-खराप भऽ सकैए मुदा एकटा विचारक केर तौरपर हम ईहो मानै छी जे खराप रचनाकेँ येन-केन-प्रकारेण "नीक" साबित करबाक उद्योग अंततः रचनाकारक पतनक पहिल सीढ़ी बनैए आ साहित्यक पतन केर सेहो । आशीष अनचिन्हार 2 कथित गजल संग्रह (जे बिना बहर-काफिया केर हो) आब हमरा प्राप्त नै होइए। बहुत रास प्रकाशकीय-लेखकीय निर्देश अनचिन्हारक नामपर देल गेल छै से हमरा बुझाइए (एकर अपवाद सेहो छै) आ तँइ  Kamal Mohan Chunnu कमल मोहन चुन्नू जीक कथित गजल संग्रह "आबि रहल एक हाहि" केर भूमिका फोटो रूपमे प्राप्त करबाक जोगाड़ हमरा करए पड़ल। एहि ठाम रचनाकार खुश भऽ सकै छथि जे हम एतेक प्रतापी जे हमरा `कियो "इग्नोर" नै कऽ सकल मुदा हुनका शायद ई पता हेतनि जे एहि पाँतिक लेखक केकरो इग्नोर करिते नै छै । कहियो-कहियो आलस आबि जाइए तँ वरिष्ठ सभ कहि दै छथि जे जाहि विधामे छी ताहि विधाक मामूलियो बातकेँ नोटिस लेबाक चाही आ तकर बाद फेर मोन बनि जाइत छै आ तकरे परिणाम अछि ई आलेख (सीधा बात जे ओ सभ हमरा