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मार्च, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक

गजल

अहाँ बिनु नै जी सकब हम अलग रहि करि की सकब हम बिछोड़क ई नोर नैनक बहल कोना पी सकब हम जरल मोनक वेदना ये कते सहि सजनी सकब हम मिलत जे प्रेमक सुईया हिया फाटल सी सकब हम विरहमे नित आब कुन्दन बिता नै जिनगी सकब हम बहरे-मजरिअ (1222-2122) © कुन्दन कुमार कर्ण

तस्वीर - हम धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक संग

Kundan Kumar Karna with Dhirendra Premarshi

फेसबुक अवगत - मैथिली सिने संसारमे प्रकाशित अन्तर्वार्ता पर आएल फेसबुक प्रतिकृया

मैथिली सिने संसार पत्रिकाक अगहन/पुष अंकमे प्रकाशित हमर मैथिली गजल विशेष अन्तरवार्ता पर फेसबुक मार्फत प्राप्त किछु महत्वपूर्ण प्रतिकृया :

गजल (होरी/होली विशेष)

Holi Ghazal by Kundan Kumar Karna

गजल (होरी/होली विशेष)

खुशीक अनेक रंग सब पर बरसै हँसीक इजोर संग जिनगी चमकै अबीर गुलाल बीच फगुआ शोभै गुलाब समान देह गम-गम गमकै उमंग हियासँ नै घटै कहियो धरि बसन्त बहार अंगना घर टहलै मिलान जुलान केर पावनि थिक ई दरेग दयाक चाहमे सब बहकै विरान जकाँ रहब हमहुँ नै कुन्दन हमर जँ सिनेह लेल केओ तरसै मात्राक्रम : 121-121-2122-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

हम

Kundan Kumar Karna