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विशेष

प्रदेश-2 में फिर उपजा भाषा विवाद (हिन्दी अनुवाद)

केंद्र में सरकार बदलने से प्रदेश 2 भी अछूता नहीं रहा। परिणामस्वरूप, एक मंत्री और एक राज्य मंत्री के साथ नेकपा माओवादी (केंद्र) भी सरकार में शामिल हो गयी। माओवादी केंद्र की ओर से भरत साह ने आंतरिक मामला और संचार मंत्री के रूप में शपथ ली और रूबी कर्ण ने उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले दोनों मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने का स्टैंड लिया था। पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अफसोस जताया कि कानून में कमी के कारण वे अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ नहीं ले सके और कहा कि शपथ की भाषा पर असहमति के कारण शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई। लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने मातृभाषा में शपथ लेने पर अध्यादेश लाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोपहर तीन बजे दोनों मंत्रियों का शपथ ग्रहण होना था। लेकिन भाषा विवाद के चलते यह कार्यक्रम दोपहर 4 बजे शुरू हो सका। इनलोगों ने मैथिली भाषा में लिखा एक प्रतीकात्मक शपथ पत्र भी प्रदेश 2 के प्रमुख राजेश झा को सौंपा था। मातृभाषा मैथिली के प्रति प्रेम और स्नेह को लेकर प्रदेश 2 में चर्चा में आए मंत्री साह ने एक सप्ताह पहले एक कार्यक्

अन्तरवार्ता - मेट्रो एफ.एम. 94.6 मेगाहर्ज पर

दिनांक 28.05.2015 : काठमाण्डू महानगर पालिका द्वारा संचालित आ राष्ट्रिय सभागृहसँ प्रसारणरत मेट्रो एफ.एम. 94.6 मेगाहर्ज पर कार्यक्रम मिथिलाञ्चलमे कार्यक्रम संचालक सरोज खिलाडी द्वारा कएल गेल मैथिली गजल आ साहित्य सम्बन्धि प्रत्यक्ष साक्षात्कार कालमे लेल गेल र्इ तस्वीर ।

गजल (भू-कम्पक सन्दर्भमे)

घर छोडि डरमे जी रहल छी एहन शहरमे जी रहल छी दिन राति छी काटैत एना जेना कहरमे जी रहल छी संसार अपनेमे मगन छै  भगवान भरमे जी रहल छी प्रकृतिसँ हारल अछि परिस्थिति कालक असरमे जी रहल छी मजबूर छी जिनगीसँ कुन्दन तँइ एसगरमे जी रहल छी मात्राक्रम : 221-222-122 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल (भू–कम्पक सन्दर्भमे)

सम्पूर्ण भूकम्प पीड़ित आ एहि कारणे अपना सभक बीचसँ गुजरलप्रति श्रद्धाञ्लीस्वरूप समर्पित ई गजल जै ठाँ छल काइल नित जिनगीक मुस्कान तै ठाँ बस नोरक रहि गेलै किए स्थान हे ईश्वर ई केहन खेल प्रकृति केर लोकक घर जेना अछि बनि गेल शमसान गजलक अक्षर-अक्षर कानैत अछि आब कहि धरती कोना यौ बनि गेल बइमान कहियो सुन्नरता जै देशक रहल शान छन भरिमे सभ ओ मेटा गेल पहचान आशा मोनक कुन्दन अछि जीविते मोर उगबे करतै जिनगीमे एक दिन चान मात्राक्रम : 222-222-221-221 © कुन्दन कुमार कर्ण