सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

आलेख लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

शुरू भेल 'मैथिली गजल पाठशाला'

मैथिली गजल प्रबर्धनके लेल 28 डिसेम्बर 2025 सँ 'मैथिली गजल पाठशाला' शुरू कएल गेल अछि । वाट्स ऐपपर शुरू भेल एहि पाठशालासँ मैथिली गजलमे नव गजलकार सभक प्रवेश हेतै से विश्वास लेल गेल अछि । पाठशालामे अभ्यर्थी सभक संख्या उत्साहजनक रूपमे निरन्तर बढि रहल छै । एखन धरि ६० सँ बेसी अभ्यर्थी सब सकृयतापूर्वक अभ्यास कऽ रहल छथि । पाठशालामे सहजकर्ताक रूपमे प्रशिक्षण कार्यमे आशीष अनचिनहार, कुन्दन कुमार कर्ण आ अभिलाष ठाकुर उल्लेखनीय काज कऽ रहल छथि । गजलमे नव आगन्तु सभक लेल मैथिली गजल नि:शुल्क सिखबाक सुअवसर अछि ई पाठशाला । पाठशालामे प्रत्येक दिन क्रमबद्ध तरिकासँ अभ्यास भऽ रहल छै आ अभ्यर्थी सभके प्रशिक्षक सभद्वारा प्रभावकारी पृष्ठपोषण प्रदान कएल जा रहल छै । जँ मैथिली गजल सिखबामे अहूँके रुची अछि त निच्चा देल QR स्कैन करि वा लिंकपर जा कऽ पाठशालामे सहभागी भऽ सकै छी । QR लिंक एहिपर क्लीक करि 'मैथिली गजल पाठशाला'सँ जुटू

भूमिका एक, फाँक अनेक: कथित गजल संग्रह 'आबि रहल एक हाहि'कें आलोचना

1 लूरि किछुओ सीख ले नहि सदति अंदाज कर ( शाइर-बाबा बैद्यनाथ, मात्राक्रम-2122-212 ) रचनाकारक तौरपर हम ई मानै छी जे कोनो रचना नीक-खराप भऽ सकैए मुदा एकटा विचारक केर तौरपर हम ईहो मानै छी जे खराप रचनाकेँ येन-केन-प्रकारेण "नीक" साबित करबाक उद्योग अंततः रचनाकारक पतनक पहिल सीढ़ी बनैए आ साहित्यक पतन केर सेहो । आशीष अनचिन्हार 2 कथित गजल संग्रह (जे बिना बहर-काफिया केर हो) आब हमरा प्राप्त नै होइए। बहुत रास प्रकाशकीय-लेखकीय निर्देश अनचिन्हारक नामपर देल गेल छै से हमरा बुझाइए (एकर अपवाद सेहो छै) आ तँइ  Kamal Mohan Chunnu कमल मोहन चुन्नू जीक कथित गजल संग्रह "आबि रहल एक हाहि" केर भूमिका फोटो रूपमे प्राप्त करबाक जोगाड़ हमरा करए पड़ल। एहि ठाम रचनाकार खुश भऽ सकै छथि जे हम एतेक प्रतापी जे हमरा `कियो "इग्नोर" नै कऽ सकल मुदा हुनका शायद ई पता हेतनि जे एहि पाँतिक लेखक केकरो इग्नोर करिते नै छै । कहियो-कहियो आलस आबि जाइए तँ वरिष्ठ सभ कहि दै छथि जे जाहि विधामे छी ताहि विधाक मामूलियो बातकेँ नोटिस लेबाक चाही आ तकर बाद फेर मोन बनि जाइत छै आ तकरे परिणाम अछि ई आलेख (सीधा बात जे ओ सभ हमरा ...

कौन सी रचना गजल हैं, कौन सी नहीं ? (हिन्दी अनुवाद)

गजल सम्बन्धी नेपाली भाषामे "कुन रचना गजल हो, कुन होइन ?" शीर्षकमे जुलाई, २०२० मे नेपालक राष्ट्रिस्तरकें न्यूजपोर्टल सभमे प्रकाशित भऽ चूकल आलेखक नई उम्मीद मैगजिनमे प्रकाशित हिन्दी अनुवाद- गजलः नव उम्मीदमे प्रकाशित आलेखक हिन्दी अनुवाद - पहिल पृष्ठ गजलः नव उम्मीदमे प्रकाशित आलेखक हिन्दी अनुवाद - दोसर पृष्ठ गजलः नव उम्मीदमे प्रकाशित आलेखक हिन्दी अनुवाद - तेसर पृष्ठ

प्रदेश-2 में फिर उपजा भाषा विवाद (हिन्दी अनुवाद)

केंद्र में सरकार बदलने से प्रदेश 2 भी अछूता नहीं रहा। परिणामस्वरूप, एक मंत्री और एक राज्य मंत्री के साथ नेकपा माओवादी (केंद्र) भी सरकार में शामिल हो गयी। माओवादी केंद्र की ओर से भरत साह ने आंतरिक मामला और संचार मंत्री के रूप में शपथ ली और रूबी कर्ण ने उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले दोनों मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने का स्टैंड लिया था। पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अफसोस जताया कि कानून में कमी के कारण वे अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ नहीं ले सके और कहा कि शपथ की भाषा पर असहमति के कारण शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई। लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने मातृभाषा में शपथ लेने पर अध्यादेश लाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोपहर तीन बजे दोनों मंत्रियों का शपथ ग्रहण होना था। लेकिन भाषा विवाद के चलते यह कार्यक्रम दोपहर 4 बजे शुरू हो सका। इनलोगों ने मैथिली भाषा में लिखा एक प्रतीकात्मक शपथ पत्र भी प्रदेश 2 के प्रमुख राजेश झा को सौंपा था। मातृभाषा मैथिली के प्रति प्रेम और स्नेह को लेकर प्रदेश 2 में चर्चा में आए मंत्री साह ने एक सप्ताह पहले एक कार्यक्...

सूर्योदय अघि नै सूर्यास्त: मैथिली गजल संग्रह 'सूर्यास्तसँ पहिने'को आलोचना

'सूर्यास्तसँ पहिने'(सूर्यास्त भन्दा पहिले) यो नाम हो डा.राजेन्द्र विमल जीको गजल संग्रहको । यो संग्रहको भूमिकाको अन्तिम भागमा विमल जी लेख्नु हुन्छ "यो मैथिली भाषाको पहिलो यस्तो गजल संग्रह हो जसमा १००(एक सय) गजल प्रस्तुत गरिएको छ ।" जबकी, मैले जाने सम्म सन् १९८५ मा प्रकाशित गजल संग्रह 'लेखनी एक रंग अनेक' जुन कि रवीन्द्रनाथ ठाकुरको हो जसमा कुल १०९(एक सय नौ) वटा गजल संगसंगै कता समेत समावेश गरिएको छ । तब विमल जीको यो 'पहिलो' जस्तो घोषणाको अर्थ के? यो हुन सक्छ की विमल जी यसलाई नेपालीय मैथिलीको सन्दर्भमा लेख्नु भएको होला तब त यो झनै गडबड........। कारण विमल जीको यो गजल संग्रहमा कुल ४(चार) वटा गजल दोहोरिएको छ ।  गजल संग्रहको कभर पेज अर्थात्, शुद्ध रूपले हेर्दा यो गजल संग्रहमा कुल ९६ वटा गजल रहेको छ । मलाई विमल जी जस्तो साहित्यकार संग यस्तो आशा थिएन की वहाँ पहिलो हुनकै लागि यस्तो कार्य गर्नु हुन्छ । इतिहासलाई आफ्नो फाइदाका लागि गलत साबित गर्नु हुन्छ । अब नेपालका विद्वान समीक्षकहरूले भन्नु हुन्छ कि के कुरा छ । मेरो टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धताको लागि छ । गजल संख्...

संविधानले दिएको अधिकार उपयोग गर्न नसकेको प्रदेश सरकार

केन्द्रमा सरकार परिवर्तनको असर प्रदेश नं.२ मा पनि पर्यो फलस्वरूप एउटा मन्त्री र एउटा राज्यमन्त्री सहित नेकपा माओवादी (केन्द्र) पनि सरकारमा सहभागी भयो । माओवादी केन्द्रको तर्फबाट आन्तरिक मामिला तथा सञ्चार मन्त्रीको रूपमा भरत साह र सोही मन्त्रालयका राज्यमन्त्रीका रूपमा रूवी कर्णले शपथ लिए । यस अघि मन्त्रीद्वयले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ लिने अडान लिएका थिए । मन्त्रीको शपथ लिए लगतै उनीहरूले मन्तव्य राख्दै कानून अभावको कारणले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ ग्रहण गर्न नपाएकोमा दुःख व्यक्त गरे र शपथको भाषाको विषयमा कुरा नमिलेका कारण शपथ ग्रहण समारोह ढिलो गरी शुरु भएको बताए । शपथ ग्रहण लगत्तै उनले मातृभाषामा शपथ लिने सम्बन्धी अध्यादेश ल्याउने प्रतिबद्धता समेत व्यक्त गरे । मन्त्रीद्वयले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ लिने र शपथ ग्रहण पत्र मैथिलीमै हुनुपर्ने भनी भाषा विवादकै कारण दिउँसो ३ बजेका लागि तय भएको शपथ ग्रहण ४ बजेपछि मात्र शुरु भएको थियो । उनीहरूले प्रदेश नं.२ का प्रदेश प्रमुख राजेश झालाई मैथिली भाषामा लेखिएको प्रतिकात्मक शपथ-पत्र समेत बुझाएका थिए । मातृभाषा मैथिलीप्रतिको प्रेम र लगाव देखाएर प्रदेश नं.२...

गजल सम्बन्धी प्राय: पूछल जाइवला प्रश्न आ तकर उत्तर (FAQ)

गजल की छै ? बहरमे कहल किछु शेर छै । बहर की छै ? पाँतिक एक समान मात्राक्रम बहर छै । शेरमे की छै ? बहरमे दू पाँति छै । Ghazal: FAQ दू पाँतिमे की छै ? पहिल मतला अंतिम मकता आ बीच बला आन शेर छै । मतलामे की छै ? मतलाक दूनू पाँतिमे काफिया आ रदीफ छै । काफिया की छै ? काफिया तुकांत छै । रदीफ की छै ? कोनो पाँतिक अंतिम उभयनिष्ठ रदीफ छै । मकता की छै ? मकता गजलक अंतिम शेर छै जाहिमे लोक अपन नाम लीखै छै । इएह गजल छै । (आशीष अनचिन्हार)

गजल आ गीतमे अन्तर की छै ?

गजल आ गीत मे अंतर की छै? मात्र एक अक्षर के । गीत आ गजल दूनू गाओल जाइ छै । जँ ध्वनीक तुक {राइम्स } सभ पाँति मे मिलैत रहत त' गीत वा गजल दूनू सुनै मेँ बेशी नीक लागै छै । मुदा गीत मे राइम्स नहियो हेतै त' चलतै मुदा गजल मेँ प्राय: पाँति संख्याँ 1 ,2,आ तकरा वाद 4 ,6 , 8 , 10 . . . मे हेवाक चाही । गीत मे कतेको पाँति के बाद फेर सँ मुखरा दोहराओल जाइ छै मुदा गजल मे प्राय: तुकान्त वाला पाँति बाद कहल जाइ छै । गजल कम सँ कम 10 टा पाँतिक होइ छै जकरा 2-2 पाँति के रूप मे बाँटि क शेर कहल जाइ छै । । जहिना गीतक शास्त्र व्याकरण होइ छै{सा रे ग . . .} तहिना गजलक व्याकरण होइ छै । जहिना शास्त्रीय गायण मे राग होइ छै तहिना गजल मे बहर होइ छै । जहिना गीत कोनो ने कोनो ताल . राग . मे होइ छै तहिना गजल कोनो ने कोनो बहर मे होइ छै । । आब कहू गीत आ गजल मे अंतर की? नवका गायक त' गीतक टाँग -हाथ तोड़ि क' गाबै छथि । दू तीन टा शब्द के एकै साथ जोड़ि क' गाबैत छथि बूझू जे फेविकाँल सँ साटि देने होइ । जहिना गीत मे कोनो तरहक चिन्हक {कोमा ,फूल स्टाँप , आदि} के मोजरे नै दै छथि । ओहिना गजल मे कोना पाँति मे कोनो चिन्ह...

कुन रचना गजल हो, कुन होइन ?

इन्टरनेट तथा सामाजिक सञ्जालले गर्दा सर्जकहरुलाई   आफ्ना सृजना पाठकहरु समक्ष पुर्याउन अत्यन्त सहज र सरल भएको छ । विद्युतीय पुस्तक तथा ब्लागहरु पढ्ने चलन बढ्दो क्रममा छ । सर्जकहरुले आफ्ना रचनाहरुको सम्बन्धमा पाठकहरुको प्रशंसा र प्रतिकृया सामाजिक सञ्जाल मार्फत द्रुतगतिमा पाउने हुनाले सामाजिक सञ्जालहरुमा व्यापक रुपमा साहित्यिक गतिविधि भै रहेको देख्न सकिन्छ । साहित्यका विभिन्न विधाहरुका नामबाट सयौं समूह तथा पेजहरु निर्माण भएका छन् ।   यहीं सहजता र सरलताले गर्दा सर्जकहरुको संख्या समेत दिनानुदिन बढ्दै गइरहेको छ । ब्लाग तथा सामाजिक सञ्जालहरुमा कविता ,  कथा ,  लघु कथा ,  गजल ,  हाइकु ,  दोहा ,  गीत आदी लगायत विधाका रचनाहरु निरन्तर साझा भै राखेका हुन्छन् । साहित्यिक गतिविधि तथा रचनाकारहरुको संख्यामा वृद्धि हुनु साहित्यका लागि सकारात्मक कुरा भएतापनि अध्धययन , अभ्यास र शिल्पको अभावमा कुनैपनि विधाको नियम नै नजानी जथाभावी गरिने रचनाले साहित्यमा विकृति र पाठकमा भ्रम सृजना नहोस् भनेर त्यतिकै सचेत हुनुपर्ने अवस्था देखिन्छ । जापानीज साहित्यबाट आएको हाइक...