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कविता : पराती

रंग विरंगक भास छलै गीत गबैत परात रहै भोर कहै शुभभोर सदा बड्ड मजा छल बड्ड मजा आब दलानक शान कहाँ बूढ़ पुरानक गान‌ वला इन्टरनेटक शासनमे संस्कृति खातिर सोचत के छन्द : सारवती (ऽ।। ऽ।। ऽ।। ऽ) Kundan Kumar Karna
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सांकेतिक भाषामे गजल (Ghazal in Sign Language))

प्रस्तुत अछि न्यून श्रवणशक्ति एवम् श्रवणविहिन व्यक्ति सभ धरि गजल पहुँचेबाक उद्देशयसँ सम्भवत पहिल बेर प्रयोगक रूपमे कुन्दन कुमार कर्णक कहल एक नेपाली गजलक मतला आ एक टा शेर सांकेतिक भाषामे । जकरा प्रस्तुत केने छथि 'राष्ट्रिय सांकेतिक भाषा दोभाषे संघ', नेपालक महासचिव सन्तोषी घिमिरे । आबैवला दिनमे किछु मैथिली गजल सेहो सांकेतिक भाषामे परसबाक प्रयास रहत । सांकेतिक भाषामे गजल कहैत सन्तोषी घिमिरे संतोषी घिमिरेक संग कुन्दन कुमार कर्ण

गजल : देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै

देखू लाठीयेक सब ठां शोर भेल छै लोकतन्त्रेमे कलम कमजोर भेल छै ककरा पर करतै भरोसा आमलोक सब कुर्सी पबिते सैह देखू चोर भेल छै बस्ती बस्ती छै चलल परिवर्तनक लहरि आइ शोणित लोककें इन्होर भेल छै एक टा सब्जी कते दिन खाइते रहत नव सुआदक लेल लोकक जोर भेल छै चान‌ दिस ताकै गगनमे आब के कहू दूरभाषे यन्त्र मनुषक खोर भेल छै ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽऽ - ऽ।ऽ - ।ऽ © कुन्दन कुमार कर्ण Kundan Kumar Karna

सात टा गजल संग्रहक आलोचना एक संग

पसरल भ्रम खत्म हेतैः गजलक संदर्भमे विदेहक नव अंकमे प्रकाशित आशीष अन्चिन्हारक आलेख 1 अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) 2022 मे फेर अपन सुपरहिट क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati)’ सँ टीवीपर एलाह। एहि "कौन बनेगा करोड़पति" केर प्रोमोमे एकटा कंटेस्टेंट अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan KBC)क सामने हॉट सीटपर बैसल छथि आ बिग बी कंटेस्टेंटसँ सवाल कऽ रहल छथिन। बिग बी कंटेस्टेंटसँ पूछै छथिन- ‘एहिमेमेसँ कोन वस्तुमे जीपीएस केर टेक्नोलॉजी लागल छै?’ एहि संगे बच्चन जी कंटेस्टेंटकेँ चारिटा ऑप्शन दै छथिन । अमिताभ बच्चन एहि सवालक जवाब के लिए ऑप्शन दैत छथिन- ‘A) टाइपराइटर, B) टेलीविजन, C) सैटेलाइट, D) 2 हजारक नोट.’ सामने बैसल कंटस्टेंट एहि प्रश्नक जवाबमे D ऑप्शन यानी 2 हजारक नोटकेँ चुनैत छथि। एहिपर बिग बी कहलखिन जे ई जवाब गलत अछि मुदा कंटेस्टेंटकेँ एहिपर विश्वास नै होइत छै । ओ कहै छै ‘अहाँ हमरा संग मजाक (प्रैंक) कऽ रहल छी ने" एहिपर बिग बी कहैत छथिन जे अहाँक उत्तर सचमे गलत अछि । कंटेस्टेंट फेर कहै छनि जे हम न्यूजमे तँ इएह देखने रहियै तँ एहिमे हमर कोन गलती? गलती तँ पत्रकार सभहक छ

अशआर

शब्दमे नै सीमित छै गजल भाव छै तँइ जीवित छै गजल सर्वसाधारणकें दोष की बुद्धिमानसँ पीड़ित छै गजल अश‌आर

बाल गजल - हाथी चलै बजार

हाथी चलै बजार कुत्ता भुकै हजार माए गे भूख लगलै चुल्हा कने पजार बनबै किसान करबै पप्पा जकाँ गजार कागतके घर बनेलौं तकरो तूँ नै उजार ऽऽ।ऽ - ।ऽऽ

कविता - हम आधुनिक समाज छी

हम आधुनिक समाज छी हमरामे नै चेतना रहलै नै दशर्न रहलै नै अध्ययन रहलै सब किछु बिसरि गेल छी हम त मरि गेल छी कविता

हिन्दी फिल्मक गीतमे बहर

गीत - अगर मुझ से मुहब्बत है...... फिल्म - आप की परछाइयां (१९६४) गीतकार - राजा मेहदी अली खान गायिका - लता मंगेश्वर संगीतकार - मदन‌ मोहन‌ 1222 - 1222 - 1222 - 1222 (बहर - हजज मुसम्मन सालिम) अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो इन आँखों का हर इक आँसू मुझे मेरी क़सम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है....... तुम्हारे ग़म को अपना ग़म बना लूँ तो क़रार आए तुम्हारा दर्द सीने में छुपा लूँ तो क़रार आए वो हर शय जो तुम्हें दुःख दे मुझे मेरे सनम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है........ शरीक ए ज़िंदगी को क्यूँ शरीक-ए-ग़म नहीं करते दुखों को बाँट कर क्यूँ इन दुखों को कम नहीं करते तड़प इस दिल की थोड़ी सी मुझे मेरे सनम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है....... इन आँखों में ना अब मुझको कभी आँसूँ नज़र आए सदा हँसती रहे आँखें सदा ये होंठ मुस्काये मुझे अपनी सभी आहें सभी दर्द ओ अलम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो इन आँखों का हर इक आँसू मुझे मेरी क़सम दे दो अगर मुझसे मुहब्बत है..... तक्तीअ अगर मुझसे/ मुहब्बत है/ मुझे सब अप/ ने ग़म दे दो इनाँखों का/ हरिक आँसू/ मुझे मेरी/ क़सम दे दो तुम्हारे ग़म/ को अपना ग़म/ बना लूँ तो/ क़रारा

गजल: जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या

जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या हियामे चोट आ बदनमे आगि लगा चलि या छियै हम ठाढ़ एहि पार सात समुन्दरकें हियामे प्रेम छौ त आइ पानि सुखा चलि या जरै हमरासँ लोकवेद हार हमर देखि भने हमरा हराक सभकें‌ फेर जरा चलि या बरेरी पर भऽ ठाड़ हम अजान करब प्रेमक समाजक डर जँ तोरा छौ त सभसँ नुका चलि या जमाना बूझि गेल छै बताह छियै हमहीं समझ देखा कनी अपन सिनेह बचा चलि या 1222-1212-12112-22 © कुन्दन कुमार कर्ण