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प्रदेश-2 में फिर उपजा भाषा विवाद (हिन्दी अनुवाद)

केंद्र में सरकार बदलने से प्रदेश 2 भी अछूता नहीं रहा। परिणामस्वरूप, एक मंत्री और एक राज्य मंत्री के साथ नेकपा माओवादी (केंद्र) भी सरकार में शामिल हो गयी। माओवादी केंद्र की ओर से भरत साह ने आंतरिक मामला और संचार मंत्री के रूप में शपथ ली और रूबी कर्ण ने उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले दोनों मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने का स्टैंड लिया था। पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अफसोस जताया कि कानून में कमी के कारण वे अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ नहीं ले सके और कहा कि शपथ की भाषा पर असहमति के कारण शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई। लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने मातृभाषा में शपथ लेने पर अध्यादेश लाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोपहर तीन बजे दोनों मंत्रियों का शपथ ग्रहण होना था। लेकिन भाषा विवाद के चलते यह कार्यक्रम दोपहर 4 बजे शुरू हो सका। इनलोगों ने मैथिली भाषा में लिखा एक प्रतीकात्मक शपथ पत्र भी प्रदेश 2 के प्रमुख राजेश झा को सौंपा था। मातृभाषा मैथिली के प्रति प्रेम और स्नेह को लेकर प्रदेश 2 में चर्चा में आए मंत्री साह ने एक सप्ताह पहले एक कार्यक्
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सूर्योदय अघि नै सूर्यास्त: मैथिली गजल संग्रह 'सूर्यास्तसँ पहिने'को आलोचना

'सूर्यास्तसँ पहिने'(सूर्यास्त भन्दा पहिले) यो नाम हो डा.राजेन्द्र विमल जीको गजल संग्रहको । यो संग्रहको भूमिकाको अन्तिम भागमा विमल जी लेख्नु हुन्छ "यो मैथिली भाषाको पहिलो यस्तो गजल संग्रह हो जसमा १००(एक सय) गजल प्रस्तुत गरिएको छ ।" जबकी, मैले जाने सम्म सन् १९८५ मा प्रकाशित गजल संग्रह 'लेखनी एक रंग अनेक' जुन कि रवीन्द्रनाथ ठाकुरको हो जसमा कुल १०९(एक सय नौ) वटा गजल संगसंगै कता समेत समावेश गरिएको छ । तब विमल जीको यो 'पहिलो' जस्तो घोषणाको अर्थ के? यो हुन सक्छ की विमल जी यसलाई नेपालीय मैथिलीको सन्दर्भमा लेख्नु भएको होला तब त यो झनै गडबड........। कारण विमल जीको यो गजल संग्रहमा कुल ४(चार) वटा गजल दोहोरिएको छ ।  गजल संग्रहको कभर पेज अर्थात्, शुद्ध रूपले हेर्दा यो गजल संग्रहमा कुल ९६ वटा गजल रहेको छ । मलाई विमल जी जस्तो साहित्यकार संग यस्तो आशा थिएन की वहाँ पहिलो हुनकै लागि यस्तो कार्य गर्नु हुन्छ । इतिहासलाई आफ्नो फाइदाका लागि गलत साबित गर्नु हुन्छ । अब नेपालका विद्वान समीक्षकहरूले भन्नु हुन्छ कि के कुरा छ । मेरो टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धताको लागि छ । गजल संख्

संविधानले दिएको अधिकार उपयोग गर्न नसकेको प्रदेश सरकार

केन्द्रमा सरकार परिवर्तनको असर प्रदेश नं.२ मा पनि पर्यो फलस्वरूप एउटा मन्त्री र एउटा राज्यमन्त्री सहित नेकपा माओवादी (केन्द्र) पनि सरकारमा सहभागी भयो । माओवादी केन्द्रको तर्फबाट आन्तरिक मामिला तथा सञ्चार मन्त्रीको रूपमा भरत साह र सोही मन्त्रालयका राज्यमन्त्रीका रूपमा रूवी कर्णले शपथ लिए । यस अघि मन्त्रीद्वयले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ लिने अडान लिएका थिए । मन्त्रीको शपथ लिए लगतै उनीहरूले मन्तव्य राख्दै कानून अभावको कारणले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ ग्रहण गर्न नपाएकोमा दुःख व्यक्त गरे र शपथको भाषाको विषयमा कुरा नमिलेका कारण शपथ ग्रहण समारोह ढिलो गरी शुरु भएको बताए । शपथ ग्रहण लगत्तै उनले मातृभाषामा शपथ लिने सम्बन्धी अध्यादेश ल्याउने प्रतिबद्धता समेत व्यक्त गरे । मन्त्रीद्वयले मातृभाषा मैथिलीमा शपथ लिने र शपथ ग्रहण पत्र मैथिलीमै हुनुपर्ने भनी भाषा विवादकै कारण दिउँसो ३ बजेका लागि तय भएको शपथ ग्रहण ४ बजेपछि मात्र शुरु भएको थियो । उनीहरूले प्रदेश नं.२ का प्रदेश प्रमुख राजेश झालाई मैथिली भाषामा लेखिएको प्रतिकात्मक शपथ-पत्र समेत बुझाएका थिए । मातृभाषा मैथिलीप्रतिको प्रेम र लगाव देखाएर प्रदेश नं.२

दोहा

मैथिली दोहा १. बारह बरिस स्कूल पढ़ल, सात बरिस काॅलेज । आदमी  सन  लक्षण  नै,  बढलै  की  नाॅलेज ।। २. पद  खातिर  पावनि  करै, पैसा खातिर पाप । केहन  गणतन्त्र  एलै,  जनता  करै  विलाप ।। ३. धन  पाछू  मरै सब जन, धनकें नै छै अन्त । बिनु धन जे धनीक लगै, तकरे नाओ सन्त ।। © कुन्दन कुमार कर्ण

परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक ।  अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनकपुर स

गजल सम्बन्धी प्राय: पूछल जाइवला प्रश्न आ तकर उत्तर (FAQ)

गजल की छै ? बहरमे कहल किछु शेर छै । बहर की छै ? पाँतिक एक समान मात्राक्रम बहर छै । शेरमे की छै ? बहरमे दू पाँति छै । Ghazal: FAQ दू पाँतिमे की छै ? पहिल मतला अंतिम मकता आ बीच बला आन शेर छै । मतलामे की छै ? मतलाक दूनू पाँतिमे काफिया आ रदीफ छै । काफिया की छै ? काफिया तुकांत छै । रदीफ की छै ? कोनो पाँतिक अंतिम उभयनिष्ठ रदीफ छै । मकता की छै ? मकता गजलक अंतिम शेर छै जाहिमे लोक अपन नाम लीखै छै । इएह गजल छै । (आशीष अनचिन्हार)

गजल आ गीतमे अन्तर की छै ?

गजल आ गीत मे अंतर की छै? मात्र एक अक्षर के । गीत आ गजल दूनू गाओल जाइ छै । जँ ध्वनीक तुक {राइम्स } सभ पाँति मे मिलैत रहत त' गीत वा गजल दूनू सुनै मेँ बेशी नीक लागै छै । मुदा गीत मे राइम्स नहियो हेतै त' चलतै मुदा गजल मेँ प्राय: पाँति संख्याँ 1 ,2,आ तकरा वाद 4 ,6 , 8 , 10 . . . मे हेवाक चाही । गीत मे कतेको पाँति के बाद फेर सँ मुखरा दोहराओल जाइ छै मुदा गजल मे प्राय: तुकान्त वाला पाँति बाद कहल जाइ छै । गजल कम सँ कम 10 टा पाँतिक होइ छै जकरा 2-2 पाँति के रूप मे बाँटि क शेर कहल जाइ छै । । जहिना गीतक शास्त्र व्याकरण होइ छै{सा रे ग . . .} तहिना गजलक व्याकरण होइ छै । जहिना शास्त्रीय गायण मे राग होइ छै तहिना गजल मे बहर होइ छै । जहिना गीत कोनो ने कोनो ताल . राग . मे होइ छै तहिना गजल कोनो ने कोनो बहर मे होइ छै । । आब कहू गीत आ गजल मे अंतर की? नवका गायक त' गीतक टाँग -हाथ तोड़ि क' गाबै छथि । दू तीन टा शब्द के एकै साथ जोड़ि क' गाबैत छथि बूझू जे फेविकाँल सँ साटि देने होइ । जहिना गीत मे कोनो तरहक चिन्हक {कोमा ,फूल स्टाँप , आदि} के मोजरे नै दै छथि । ओहिना गजल मे कोना पाँति मे कोनो चिन्ह

गजल विधापर दीग्भ्रमित साहित्यकार: एक टिप्पणी

'हेलो‌ मिथिला' फेसबुक समूहपर फेसबुक लाईवमे सियाराम झा 'सरस' आ धीरेन्द्र प्रेमर्षि कऽ बीच भेल गजल सम्बन्धी संवादपर आशीष अनचिन्हारद्वारा फेसबुक पोष्टक माध्यमसँ कएल गेल टिप्पणी: काल्हि 10 जुलाई 2021 केँ एकटा फेसबुक लाइभ Dhirendra Premarshi धीरेन्द्र प्रेमर्षि एवं Siyaram Saras सियाराम झा सरसजीक बीच भेल जाहिमे बहुत मुद्दाक संग गजलोपर बात भेल आ ओ दूनू गोटे गजल विधापर बहुत रास भ्रमपूर्ण बयान सभ दैत रहलाह । ओना तँ हम सीधे कहि सकैत छलहुँ जे सियाराम झा सरसजीकेँ जे भ्रम छै तकर उत्तर हम अपन पोथी "मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास"मे लीखि देने छियै तँइ ओकरा पढ़ि लिअ । मुदा हमरा बूझल अछि जे सरसजी पूरा जीवनमे अध्ययन कम आ विद्यापति समारोह एवं अन्य मंचपर भाग बेसी लेलाह अछि । तेनाहिते प्रेमर्षिजीक पूरा समय नवयुवाकेँ भ्रमति करएमे आ मंचपर माइक पकड़एमे जाइत छनि तँइ हुनको वशमे अध्ययन नै छनि । तँइ ओइ बातचीतक किछु भ्रम आ ओकर उत्तर (जे कि हम अपन पोथीमे दऽ देने छी) एहि ठाम दऽ रहल छी । उम्मेद अछि जे धीरेन्द्रजी हमर एहि लिखलकेँ सरसजी धरि पहुँचेता जाहिसँ हुनकर भ्रमक निराकरण भऽ सकनि । ओना

थोड़े माटि बेसी पानि

शताब्दीसँ बेसीक इतिहास रहल मैथिली गजलके खास क' पछिला एक दशकसँ गजल रचना आ संग्रहक प्रकाशनमे गुणात्मक आ परिमाणात्म दुन्नू हिसाबे वृद्धि भ' रहल छै । एहि क्रममे किछु संग्रह इतिहास रचि पाठक सभक हियामे छाप छोडि देलकै तँ किछु एखनो धरि नेङराइते छै । कारण सृजनकालमे कोनो नै कोनो अंगविहिन रहि गेलै सृजना । संग्रहक भीड़मे समाहित सियाराम झा 'सरस' जीक पोथी 'थोड़े आगि थोड़े पानि' पढबाक अवसर भेटल । जकरा सुरुसँ अन्त धरि पढलाकबाद एकर तीत/मीठ पक्ष अर्थात गुणात्मकताक सन्दर्भमे विहंगम दृष्टिसँ अपन दृष्टिकोण रखबाक मोन भ' गेल । पहिने प्रस्तुत अछि पोथीके छोटछिन जानकारी: पोथी - थोड़े आगि थोड़े पानि विधा - गजल प्रकाशक - नवारम्भ, पटना (2008) मुद्रक - सरस्वती प्रेस, पटना गजल संख्या - 80टा सियाराम झा 'सरस' पोथीमे जे छै- थोड़े आगि राखू थोड़े पानि राखू बख्त आ जरुरी लै थोड़े आनि राखू (पूरा गजल पृष्ठ 85 मे) सरस जी प्रारम्भिक पृष्ठमे गहिरगर भावसँ भरल ई शेर प्रस्तुत केने छथि जे कि पोथीके नामक सान्दर्भिकता साबित क' रहल छै । पोथीमे 'बहुत महत्व राखैछ प्रतिबद्धता' शीर्षकपर द