सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

प्रदेश-2 में फिर उपजा भाषा विवाद (हिन्दी अनुवाद)

केंद्र में सरकार बदलने से प्रदेश 2 भी अछूता नहीं रहा। परिणामस्वरूप, एक मंत्री और एक राज्य मंत्री के साथ नेकपा माओवादी (केंद्र) भी सरकार में शामिल हो गयी। माओवादी केंद्र की ओर से भरत साह ने आंतरिक मामला और संचार मंत्री के रूप में शपथ ली और रूबी कर्ण ने उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले दोनों मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेने का स्टैंड लिया था। पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अफसोस जताया कि कानून में कमी के कारण वे अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ नहीं ले सके और कहा कि शपथ की भाषा पर असहमति के कारण शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई। लेकिन शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने मातृभाषा में शपथ लेने पर अध्यादेश लाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दोपहर तीन बजे दोनों मंत्रियों का शपथ ग्रहण होना था। लेकिन भाषा विवाद के चलते यह कार्यक्रम दोपहर 4 बजे शुरू हो सका। इनलोगों ने मैथिली भाषा में लिखा एक प्रतीकात्मक शपथ पत्र भी प्रदेश 2 के प्रमुख राजेश झा को सौंपा था। मातृभाषा मैथिली के प्रति प्रेम और स्नेह को लेकर प्रदेश 2 में चर्चा में आए मंत्री साह ने एक सप्ताह पहले एक कार्यक्

गजल - भावनामे बहू नै कखनो

Kundan Kumar Karna - www.facebook.com\kundan.karna

गजल - भावनामे बहू नै कखनो

भावनामे बहू नै कखनो दास मोनक बनू नै कखनो चित्त एकाग्र राखू सदिखन घोर चिन्ता करु नै कखनो मोह माया कऽ बन्धनमे यौ भुलि कऽ मरितो परु नै कखनो मीठ बोली सभक लग बाजू बात कटु सन कहू नै कखनो बाट जे लक्ष्य धरि नै पहुँचत ताहि बाटसँ चलू नै कखनो कर्म आधार छी जिनगीकेँ दूर एहिसँ रहू नै कखनो सूत्र छी किछु सफलताकेँ ई बात व्यर्थक बुझू नै कखनो मात्राक्रम : 2122-12222 © कुन्दन कुमार कर्ण

कता

कविता - जागू जागू सब मैथिल नारी

जागू जागू सब मैथिल नारी, जानकी जकाँ बनू महान् दोसरकेँ संस्कृति नक्कल नै कऽ, अपनकेँ राखू मान अपनो जागू आ सबकेँ जगाउ, सुतू नै पीबि कऽ लाजक तारी घोघ तरसँ बाहर निकलू, बनू एक होसियार मैथिल नारी बिन बाजने अधिकार नै भेटत, नै भेटत कतो कोनो सम्मान जागू जागू सब मैथिल नारी, जानकी जकाँ बनू महान् बदरी तरकेँ चानसँ नीक, स्वतन्त्र दीपकेँ ज्योति बनू कतेक दिन रहबै अन्हारमे, बुद्धिकेँ ताला जल्दी खोलू बचाउ सोहर समदाओन, नै हेरा दिओ लोक गीत कतो रहू संस्कार नै छोडू, तखने हएत मिथिलाकेँ हित मैथिली लीखू, मैथिली बाजू, बढाउ मिथिलाकेँ शान जागू जागू सब मैथिल नारी, जानकी जकाँ बनू महान् रंग बिरंगी अरिपणसँ मिथिलाकेँ ई धरती सजाउ दुनियाँ भरिमे मैथिल नारीकेँ, अदभुत कला देखाउ खाली चुल्हा चौकी केनाइ मात्र नै बुझू अपन काम डेग–डेग पर संघर्ष करु, तखने अमर हएत नाम समय पर नै जागब, त किछु नै एत भेटत असान जागू जागू सब मैथिल नारी, जानकी जकाँ बनू महान् पवित्र कर्मसँ जानकी बनल अछि नेपालक विभुति जँ हुनके बाटपर चलबै तऽ नै आएत कोनो विपति हुनके जकाँ कर्म कऽ मिथिलामे, चेतना कऽ दीप जराउ चेतनशील भऽ मिथिलामे, शिक्षाकेँ ज्योति फैलाउ मै