सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक
© कुन्दन कुमार कर्ण

बाल गजल

बाल गजल

खूब खाउ यौ बौआ  खूब गाउ यौ बौआ सूति उठि सबेरेमे  नित नहाउ यौ बौआ खेतमे चलू खेलब संग आउ यौ बौआ अंगनासँ बाहर जा नै सताउ यौ बौआ भूत सूत किछु नै छै डर भगाउ यौ बौआ  दाँत बड्ड उज्जर अछि मुस्कुराउ यौ बौआ आइ फेर कुन्दनकें लग बजाउ यौ बौआ फाइलुन्-मफाईलुन् © कुन्दन कुमार कर्ण

बाल गजल

बाल गजल

प्रकृति केर लीला अदभूत टिकल केहनो नै मजगूत चलल पूरबा छै धुरझार हवामे उड़ल टिकली फूत सजल छै समुच्चा संसार विधाताक रचना अजगूत कहल गेल बालक अवतार मनुष भूमि पर दैवक दूत उठब भिनसरे भोरे भोर समय पर हमर बौआ सूत उगल रवि किरण बदरी चीर गगनमे परम छवि साबूत लगनशील रहबै सब दिन जँ सफलता मिलत मिथिला पूत फऊलुन्-फऊलुन्-मफ़ऊल © कुन्दन कुमार कर्ण

बाल गजल

बाल गजल

हमर सुन्नर गाम छै फरल ओतऽ आम छै विपतिमे संसार यौ प्रकृति जेना बाम छै निकलि बाहर जाउ नै बिमारी सब ठाम छै सफा आ स्वस्थ्य रहब तखन कोनो काम छै जनककें सन्तान हम जनकपुर सन धाम छै अयोध्या छै घर जकर तकर नाओ राम छै कलम किनि दिअ ने लिखब बहुत सस्ता दाम छै मफाईलुन-फाइलुन © कुन्दन कुमार कर्ण