सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

गजलः जमीन पर जनता हवामे सरकार

जमीन पर जनता हवामे सरकार कहू चलत कोना गरिबक घरबार समाजवादक नारा लगबै बेजोड़ सवा करोड़क जे चढ़ै मोटरकार समाजमे निर्दोष जेतै ककरा लग कमल कऽ उप्पर भारी भेलै तलवार अमल करब सेहो जरुरी छै श्रीमान् विधान टा भेने मिलल की अधिकार जमाना एलै आब पूरा डिजिटलकें पढ़ै कहाँ छै लोक सब अखबार उठू चलू आगू बढू देशक लेल विकास खातिर लेत क्यो नै अवतार नदी कखन हम पार हेबै यौ कुन्दन चलैत नाहक टूटि गेलै पतवार © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - नेहक झूठ आश नै दिअ

नेहक झूठ आश नै दिअ धरती बिनु अकाश नै दिअ हो अस्तित्व नै हमर जतऽ तेहन ठाम बास नै दिअ अनहारे रहत हमर हिय ई फुसिकेँ प्रकाश नै दिअ हम छी जाहिमे बसल नै से बेकार सांस नै दिअ नै चाही सिनेह एहन जिनगीमे हतास नै दिअ मात्रा क्रम : 2221-2122 (मफऊलात–फाइलातुन) © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - हमरा देखिते ओ लजा गेलै

हमरा देखिते ओ लजा गेलै जादू नेहकेँ ओ चला गेलै भेलै कात नै ई नजरि कनियो चुप्पे चाप नैनसँ बजा गेलै रहितो दूर देहसँ हमर जे ओ छातीमे बुझायल सटा गेलै अनचिन्हार छल ओ मुदा एखन सदिखन लेल अप्पन बना गेलै कुन्दन केर ओ मानिकेँ जिनगी कोमलसन हियामे बसा गेलै मात्रा क्रम : 2221-2212-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

भक्ति गजल - आइ लव यू शिव

आइ लव यू शिव हियसँ बाजू शिव मोन मन्दिरमे सभ सजाबू शिव गीतमे सदिखन मात्र गाबू शिव भक्ति घट घटमे भजि जगाबू शिव एक नारा बस नित लगाबू शिव मात्राक्रम : 2122-2 © कुन्दन कुमार कर्ण