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जनवरी, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

गजल: जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या

जदी छौ मोन भेटबाक डेग उठा चलि या हियामे चोट आ बदनमे आगि लगा चलि या छियै हम ठाढ़ एहि पार सात समुन्दरकें हियामे प्रेम छौ त आइ पानि सुखा चलि या जरै हमरासँ लोकवेद हार हमर देखि भने हमरा हराक सभकें‌ फेर जरा चलि या बरेरी पर भऽ ठाड़ हम अजान करब प्रेमक समाजक डर जँ तोरा छौ त सभसँ नुका चलि या जमाना बूझि गेल छै बताह छियै हमहीं समझ देखा कनी अपन सिनेह बचा चलि या 1222-1212-12112-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - नेहक झूठ आश नै दिअ

नेहक झूठ आश नै दिअ धरती बिनु अकाश नै दिअ हो अस्तित्व नै हमर जतऽ तेहन ठाम बास नै दिअ अनहारे रहत हमर हिय ई फुसिकेँ प्रकाश नै दिअ हम छी जाहिमे बसल नै से बेकार सांस नै दिअ नै चाही सिनेह एहन जिनगीमे हतास नै दिअ मात्रा क्रम : 2221-2122 (मफऊलात–फाइलातुन) © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल - हमरा देखिते ओ लजा गेलै

हमरा देखिते ओ लजा गेलै जादू नेहकेँ ओ चला गेलै भेलै कात नै ई नजरि कनियो चुप्पे चाप नैनसँ बजा गेलै रहितो दूर देहसँ हमर जे ओ छातीमे बुझायल सटा गेलै अनचिन्हार छल ओ मुदा एखन सदिखन लेल अप्पन बना गेलै कुन्दन केर ओ मानिकेँ जिनगी कोमलसन हियामे बसा गेलै मात्रा क्रम : 2221-2212-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

भक्ति गजल - आइ लव यू शिव

आइ लव यू शिव हियसँ बाजू शिव मोन मन्दिरमे सभ सजाबू शिव गीतमे सदिखन मात्र गाबू शिव भक्ति घट घटमे भजि जगाबू शिव एक नारा बस नित लगाबू शिव मात्राक्रम : 2122-2 © कुन्दन कुमार कर्ण मैथिली भक्ति गजल