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जनवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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परिपक्व होइत मैथिली गजल: समीक्षा

ई कहब से कोनो अतिशयोक्ति नहिं जे 'मैथिली गजल' किछु साल पूर्व टिकुले रहए आइ बेस कोशा बनि तैयार भ ऽ  रहल छैक फल देबा लेल, तहियो में जँ सहजता पूर्वक मैथिलीक अपन गजलशाश्त्र भेटि जाए अन्चिनहार आखरक रूपमे तखन गजल लेल बेसी मेहनति क ऽ  खगते नहिं रहि जाइत छैक । अन्चिनहार आखरक रूपमे ई एकटा एहेन गजलशाश्त्र भेटल अछि जे मैथिली गजलकेँ अरबी, फारसी ओ उर्दू गजलक समकक्ष पहुँचेबामे समर्थ सिद्ध भ ऽ  रहल अछि। मैथिली गजलक एकटा सुप्र सिद्ध नाम जे भारत सँ ल ऽ  क ऽ  नेपाल धरि अपन गजलसँ श्रोताक माँझ एकटा भिन्न छाप छोड़निहार गजलकार श्री 'कुन्दन कुमार कर्ण' जी केँ किछु गजल- kundangajal.com केर माध्यम सँ आ किछु हुनक फेसबुकक भीतसँ पढ़बाक मौका भेटैत रहैत अछि जे हमरा लेल सौभाग्यक गप्प छै ।  हुनक किछु गजल पर हम अपन विचार राखि रहल छी । 12 मई 2020 क ऽ  एकटा बाल गजल जे शाइरक अपन वेवसाईटपर प्रेशित कएल गेल छन्हिं जे निम्नलिखित अछिः हमर सुन्नर गाम छै  फरल ओत' आम छै  विपतिमे संसार यौ  प्रकृति जेना बाम छै  निकलि बाहर जाउ नै  बिमारी सभ ठाम छै  सफा आ स्वस्थ्य रहब  तखन कोनो काम छै  जनककें सन्तान हम  जनक

गजल

कोनो दर्दमे आइ धरि मिठास नै छल भरिसक मोनमे प्रेमिकाक बास नै छल मिलिते नैन तोरासँ ठोर बाजि उठलै अनचिन्हारके टोकितों सहास नै छल सुन्नरताक संसारमे कमी कहाँ छै आरो लेल केने हिया उपास नै छल नेहक लेल भेलौं बताह नै तँ कहियो जिनगी एहि ढंगक रहल उदास नै छल प्रियतम बिनु जुआनी कटति रहै अनेरो लागल जोरगर चाहके पिआस नै छल यौवन देखलौं सृष्टिमे अनेक कुन्दन एहन पैघ भेटल कतौं सुवास नै छल 2221-2212-121-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल

नै उलहन कोनो नै उपराग तोरासँ भरिसक बनतै दोसरके भाग तोरासँ जियबै जिनगी हम माली बनिक' भमरासँ सजतै ककरो मोनक जे बाग तोरासँ पूरा हेतै से की सपनाक ठेकान अभिलाषा छल जे सजितै पाग तोरासँ तोंही छलही सरगम शुर ताल संगीत छुछ्छे आखर रहने की राग तोरासँ मेटा लेबै कुन्दन दुनियासँ अपनाक रहतै जिनगीमे नै किछु दाग तोरासँ 222-222-221-221 © कुन्दन कुमार कर्ण