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  1. मोन एखनो पारै छी अहीँकेँ
    बाट एखनो ताकै छी अहीँकेँ

    भावमे बहकि हम संगी सभक लग
    बात एखनो बाजै छी अहीँकेँ

    आब नै रहल कोनो हक अहाँपर
    जानितो गजल गाबै छी अहीँकेँ

    दीप जे जरा गेलहुँ नेहकेँ से
    नित इयादमे बारै छी अहीँकेँ

    प्रेम भेल नै कहियो बूढ कुन्दन
    साँस साँसमे चाहै छी अहीँकेँ

    मात्राक्रम : 212-1222-2122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. हियामे उमंगक अगबे लहर छै
    बुझा गेल ई त प्रेमक असर छै

    धरकि अछि रहल धरकन बड्ड जोरसँ
    रहल आब किछु नै बाँकी कसर छै

    मजा एहि जादूकेँ खूब अनुपम
    सजा मीठ सनकेँ जेना जहर छै

    गजल पर गजल कहलहुँ ओकरा पर
    मुदा बादमे बुझलहुँ बेबहर छै

    पहिल बेर कुन्दन ई बात जानल
    किए प्रेम सुच्चा जगमे अमर छै

    मात्राक्रम : 122-122-22-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. कता

    Saturday, October 4, 2014

    अहाँ गोर हम कारी छी
    मुदा एक टा प्राणी छी

    सजत रूप नै हमरा बिनु
    अहाँ देह हम सारी छी

    रहब नै अलग कखनो जुनि
    अहाँ ठोर हम लाली छी

    चलत साँस नै एको छन
    अहाँ माँछ हम पानी छी

    कहू आर की यौ कुन्दन
    अहाँ फूल हम माली छी

    मात्राक्रम : 1221-2222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. करै छी अहाँ पर विश्वास हे मैया
    कऽ दिअ ने हमर पूरा आश हे मैया

    चढायब चरणपर अड़हूल नित ललका
    करब हम अहीँकेँ उपवास हे मैया

    हरू कष्ट जग जननी पूत बुझि हमरा
    करू दर्द मोनक सभ नाश हे मैया

    जियब एहि जगमे ककरा भरोसे हम
    शरणमे त अप्पन दिअ बास हे मैया

    रहब भक्तिमे डूबल राति दिन कुन्दन
    रहत साँसमे जा धरि साँस हे मैया

    मात्राक्रम : 122-122-221-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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