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  1. कविता - जवानी

    Friday, November 28, 2014

    मोन हए छै
    अहाँकेँ जवानी
    बैँकमे राखि दी
    किएक त
    हम बूढ भ' जेबै
    तकर हमरा चिन्ता नै
    मुदा
    अहाँ जवाने रही
    से हमर अभिलाषा अछि

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. गजल

    Sunday, November 23, 2014

    की जिनगीमे आउ की दूर जाउ
    बिनु मतलबकेँ राति दिन नै सताउ

    बोली मिठगर सन अहाँ बाजि फेर
    हमरा प्रेमक जालमे नै फँसाउ

    आगूमे देखाक मुस्की अपार
    पाछूमे सदिखन छुरा नै चलाउ

    सुच्चा अछि जँ प्रेम साँचे अहाँक
    सब किछु बुझि हमरे हियामे सजाउ

    राखू नित कुन्दन जँका शुद्ध मोन
    बस झूठक कखनो हँसी नै हँसाउ

    मात्राक्रम : 2222-21-221-21

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. गजल

    Tuesday, November 11, 2014

    ओकरा देखिते देह अपने सिहरि जाइ छै
    आगि नेहक हियामे तखन यौ पजरि जाइ छै

    मारि कनखी दए छै जखन ताकि अनचोकमे
    डेग अपने हमर ओकरा दिस ससरि जाइ छै

    ओ हँसै छै त एना बुझाइत रहल बागमे
    फूल जेना गुलाबक लजाइत झहरि जाइ छै

    चानकेँ देखिते रातिमे चेहरा ओकरे
    झिलमिलाइत हमर आँखिमे सजि उतरि जाइ छै

    लाख लड़की करै छै हमर आब पाछू मुदा
    छोडि सभकेँ बहकि ओकरेपर नजरि जाइ छै

    प्रेम कुन्दन हए छै भरम से बुझा जे रहल
    एहने जालमे मोन सुधि बुधि बिसरि जाइ छै

    बहरे-मुतदारिक

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. गजल

    Monday, November 3, 2014

    एहि हारल आदमीकेँ हालचाल नै पुछू
    दर्द सुनिते जाइ बढि तेहन सवाल नै पुछू

    मारि किस्मत गेल कखनो खेल खेलमे लटा
    घर घरायल नित बिपतिमे कोन काल नै पुछू

    संग अपनो नै जरूरतिकेँ समय कतहुँ रहल
    केलकै कोना कखन के आल टाल नै पुछू

    बाट जिनगीकेँ रहल जे डेग डेगपर दुखद
    बीत कोना गेल ई पच्चीस साल नै पुछू

    के मरै छै एत यौ कुन्दन ककर इयादमे
    लोक लोकक खीच रहलै आब खाल नै पुछू

    मात्राक्रम: 2122-2122-2121-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  5. दीयावातीकेँ हम दए छी विशेष शुभकामना
    स्वीकारू सभ केओ हमर ई सनेश शुभकामना

    माए बाबू संगी बहिन भाइ जे कतहुँ रहल अछि
    चाहे केओ परदेश या दूर देश शुभकामना

    घरमे लक्ष्मीकेँ आगमन होइ सुखसँ जिनगी सजै
    प्रेमक सौगातसँ जन समर्पित अशेष शुभकामना

    वैभवमे नित होइत रहै वृद्धि शान्ति घर-घर रहै
    मठ मन्दिरमे हम दैत छी दीप लेश शुभकामना

    पावन अवसरपर आइ कुन्दन हृदयसँ दैत सभकेँ
    शुभ संध्यामे पूजैत लक्ष्मी गणेश शुभकामना

    मात्राक्रम: 22222-2122-121-2212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  6. हमरासँ प्रिय नै रूसल करू
    बेगरता मोनक बूझल करू

    बनि नेहक सुन्नर सन फूल नित
    मोनक बगियामे फूलल करू

    जखने देखै छी हमरा कतहुँ
    तखने हँसि लगमे रूकल करू

    जीवन संगी हमरे मानि जुनि
    आत्मामे बैसा पूजल करू

    काइल की हेतै मालूम नै
    एखन कुन्दनमे डूबल करू

    मात्राक्रम : 2222-22212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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