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  1. गजल

    Sunday, June 21, 2015

    साँच नेह कहियो धोखा नै दए छै
    मोनमे बिछोड़क फोंका नै दए छै

    एक बेर जे बुझियौ छुटि गेल संगी
    बेर-बेर किस्मत मौका नै दए छै

    देखियोक लगमे अन्ठा देत सदिखन
    एक छुटलहा हिय टोका नै दए छै

    त्याग साधना आ नित चाही तपस्या
    साँच नेह ईश्वर ओना नै दए छै

    दोहराक कुन्दन नेहक बात नै कर
    साँझमे पराती शोभा नै दए छै

    मात्राक्रम : 212-122-222-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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