Rss Feed
  1. गजल

    Thursday, March 10, 2016

    Tirhuta Lipi


  2. रे हिया हमरा एतेक मजबूर नै कर
    चाहमे ककरो हमरेसँ तूँ दूर नै कर

    एकटा कित्ता अछि मोन सौँसे हमर ई
    बाँटि टुकड़ी-टुकड़ीमे अलग धूर नै कर

    काँच कोमल आ नवका जुआनी चढल छै
    आगि यादक यौवनमे लगा घूर नै कर

    एक त प्रेमक खातिर पिआसल रहै छी
    ताहि पर आरो उकसाक आतूर नै कर

    भागमे ककरा कुन्दन लिखल सब रहै छै
    कल्पनामे डुबि एना मोनके झूर नै कर

    212-2222-122-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण

  3. 22 फरवरी, 2016 के रेडियो नेपालमे प्रत्यक्ष प्रसारित हमर अन्तरवार्तासँ सम्बन्धित किछु चित्र