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  1. गजल

    Friday, January 19, 2018

    कोनो दर्दमे आइ धरि मिठास नै छल
    भरिसक मोनमे प्रेमिकाक बास नै छल

    मिलिते नैन तोरासँ ठोर बाजि उठलै
    अनचिन्हारके टोकितों सहास नै छल

    सुन्नरताक संसारमे कमी कहाँ छै
    आरो लेल केने हिया उपास नै छल

    नेहक लेल भेलौं बताह नै तँ कहियो
    जिनगी एहि ढंगक रहल उदास नै छल

    प्रियतम बिनु जुआनी कटति रहै अनेरो
    लागल जोरगर चाहके पिआस नै छल

    यौवन देखलौं सृष्टिमे अनेक कुन्दन
    एहन पैघ भेटल कतौं सुवास नै छल

    2221-2212-121-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. गजल

    Tuesday, January 9, 2018

    नै उलहन कोनो नै उपराग तोरासँ
    भरिसक बनतै दोसरके भाग तोरासँ

    जियबै जिनगी हम माली बनिक' भमरासँ
    सजतै ककरो मोनक जे बाग तोरासँ

    पूरा हेतै से की सपनाक ठेकान
    अभिलाषा छल जे सजितै पाग तोरासँ

    तोंही छलही सरगम शुर ताल संगीत
    छुछ्छे आखर रहने की राग तोरासँ

    मेटा लेबै कुन्दन दुनियासँ अपनाक
    रहतै जिनगीमे नै किछु दाग तोरासँ

    222-222-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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