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  1. गजल

    Saturday, August 22, 2020

    मोन तोहर तूँ गारि दे चाहे या मारि दे
    शर्त एके टा छै हिया हमरासँ हारि दे

    लोक प्रेमी शायर पिअक्कड आदमी बुझै
    हम असलमे की आब तोंही मोन पारि दे

    चोरचनकें छै राति ताकै सब अकाशमे
    हम हृदयमे तकबै हृदय बनि तूँ निहारि दे

    रोपि तुलसी छै गेल तोरे नामकें जखन
    आबि सारा पर एक लोटा पानि ढारि दे

    प्रेम कहियो नै एकतर्फी भेल बूझि ले
    आगि अपनो तूँ ले लगा हमरो पजारि दे

    2122-2212-2212-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. Wednesday, August 5, 2020

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  3. दुन्नू आँखि मूनि बाजै छह अन्हार छै
    अपने चालि ठीक नै गलते संसार छै

    बेगरता बहुत सकरता नुनक नै छलै
    सत्ता पाबिते बनल‌ धनकें पैकार छै

    पैसा जाति धर्ममे जनते बंटल मुदा
    भ्रष्टाचार लेल बस दोषी सरकार छै

    धरतीयोक धीर टुटलै लीला देखिते
    उब्जाबै वला दुबर बेचै बौकार छै

    सम्हरि नै‌‌ रहल महामारी दुनियाँ बुते
    असरा आब गामकें बाबा डिहबार छै

    2221-2122-2221-2

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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