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नवंबर, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

शुरू भेल 'मैथिली गजल पाठशाला'

मैथिली गजल प्रबर्धनके लेल 28 डिसेम्बर 2025 सँ 'मैथिली गजल पाठशाला' शुरू कएल गेल अछि । वाट्स ऐपपर शुरू भेल एहि पाठशालासँ मैथिली गजलमे नव गजलकार सभक प्रवेश हेतै से विश्वास लेल गेल अछि । पाठशालामे अभ्यर्थी सभक संख्या उत्साहजनक रूपमे निरन्तर बढि रहल छै । एखन धरि ६० सँ बेसी अभ्यर्थी सब सकृयतापूर्वक अभ्यास कऽ रहल छथि । पाठशालामे सहजकर्ताक रूपमे प्रशिक्षण कार्यमे आशीष अनचिनहार, कुन्दन कुमार कर्ण आ अभिलाष ठाकुर उल्लेखनीय काज कऽ रहल छथि । गजलमे नव आगन्तु सभक लेल मैथिली गजल नि:शुल्क सिखबाक सुअवसर अछि ई पाठशाला । पाठशालामे प्रत्येक दिन क्रमबद्ध तरिकासँ अभ्यास भऽ रहल छै आ अभ्यर्थी सभके प्रशिक्षक सभद्वारा प्रभावकारी पृष्ठपोषण प्रदान कएल जा रहल छै । जँ मैथिली गजल सिखबामे अहूँके रुची अछि त निच्चा देल QR स्कैन करि वा लिंकपर जा कऽ पाठशालामे सहभागी भऽ सकै छी । QR लिंक एहिपर क्लीक करि 'मैथिली गजल पाठशाला'सँ जुटू

गजल - धधरा नेहक हियामें धधकैत रहि गेलै

धधरा नेहक हियामें धधकैत रहि गेलै बनि शोणित नोर आँखिसँ टपकैत रहि गेलै सपना छल प्रेम करितै केओ अपन जानिक सोचिक ई मोन सदिखन बहकैत रहि गेलै बेगरता बुझि सकल केओ नै जरल मोनक धरकन दिन राति जोरसँ धरकैत रहि गेलै ऐबे करतै सजिक मोनक मीत जिनगीमें सभ दिन ई आँखि खन–खन फरकैत रहि गेलै दाबिक सभ बात मोनक कुन्दन जबरदस्ती जगमें बनि फूल तखनो गमकैत रहि गेलै मात्राक्रम : 2222-122-221-222 © कुन्दन कुमार कर्ण