सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

शुरू भेल 'मैथिली गजल पाठशाला'

मैथिली गजल प्रबर्धनके लेल 28 डिसेम्बर 2025 सँ 'मैथिली गजल पाठशाला' शुरू कएल गेल अछि । वाट्स ऐपपर शुरू भेल एहि पाठशालासँ मैथिली गजलमे नव गजलकार सभक प्रवेश हेतै से विश्वास लेल गेल अछि । पाठशालामे अभ्यर्थी सभक संख्या उत्साहजनक रूपमे निरन्तर बढि रहल छै । एखन धरि ६० सँ बेसी अभ्यर्थी सब सकृयतापूर्वक अभ्यास कऽ रहल छथि । पाठशालामे सहजकर्ताक रूपमे प्रशिक्षण कार्यमे आशीष अनचिनहार, कुन्दन कुमार कर्ण आ अभिलाष ठाकुर उल्लेखनीय काज कऽ रहल छथि । गजलमे नव आगन्तु सभक लेल मैथिली गजल नि:शुल्क सिखबाक सुअवसर अछि ई पाठशाला । पाठशालामे प्रत्येक दिन क्रमबद्ध तरिकासँ अभ्यास भऽ रहल छै आ अभ्यर्थी सभके प्रशिक्षक सभद्वारा प्रभावकारी पृष्ठपोषण प्रदान कएल जा रहल छै । जँ मैथिली गजल सिखबामे अहूँके रुची अछि त निच्चा देल QR स्कैन करि वा लिंकपर जा कऽ पाठशालामे सहभागी भऽ सकै छी । QR लिंक एहिपर क्लीक करि 'मैथिली गजल पाठशाला'सँ जुटू

गजल

आब सहब नै दाबन ककरो जोर जुलुम आ चापन ककरो गेल जमाना क्रूरक सभकेँ घर त हमर छल आसन ककरो भेल बहुत जे भेलै काइल लोक सुनै बस भाषण ककरो पूत मधेसक छी अभिमानी सहि कऽ रहब नै शोषण ककरो दर्द विभेदक भारी कुन्दन माथ हमर अछि चानन ककरो मात्राक्रम : 2112-222-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

भक्ति गजल (सरस्वती वन्दना)

Saraswati Pooja

भक्ति गजल (सरस्वती वन्दना)

हे शारदे दिअ एहन वरदान हो जैसँ जिनगी हमरो कल्याण पूजब सदति हे माए बनि पूत अपना शरणमे दिअ हमरा स्थान निष्काम हो मोनक सभ टा आश सुख शान्ति आ जगमे दिअ सम्मान जिनगी समाजक लागै शोकाज हमरा बना दिअ तेहन गुणवान लिअ प्रार्थना कुन्दनकेँ स्वीकारि बल वुद्धि विद्या आ दिअ ने ज्ञान मात्राक्रम : 2212-222-221 © कुन्दन कुमार कर्ण

गजल

तोरा आदर कि केलियौ तूँ त हमरा सस्ता बुझि लेलही बस अपनाकेँ गुलाब हमरा सुखल सन पत्ता बुझि लेलही मोनक कुर्सी कि देलियौ बैस तोरा एके छन लेल हम हमरे जिनगीक तूँ अपन राजनीतिक सत्ता बुझि लेलही गजलक गंभीरता मधुरता असलमे तोरा की मालूम हमरा शाइर त बात दूरक अपन तूँ भगता बुझि लेलही शारीरिक हाउ भाउ तोहर बुझाइत रहलहुँ एना सदति जेना नेहक रहै पहिल बेर हमरे खगता बुझि लेलही नै छै जै मोनमे रहल चाह नेहक कोनो कुन्दन हमर तै मोनसँ हम किएक जोडब अधूरा नाता बुझि लेलही मात्राक्रम : 22221-212-2122-222-212 © कुन्दन कुमार कर्ण

हम

Kundan Kumar Karna

गजल

साँचमे शायद ओ नै चाहैत रहै मोन झुठ्ठे सदिखन पतिआबैत रहै फुलि हमर आगू ओ सुन्नर फूल जकाँ बाग पाछू अनकर गमकाबैत रहै हम हियामे बैसेलहुँ बुझि नेह अपन तेँ सदति हमरा ओ तड़पाबैत रहै साँच नेहक दुनियामे अछि मोल कहाँ लोक जैमे जिनगी बीताबैत रहै जाइ छल मन्दिर नित कुन्दन संग मुदा प्राथनामे दोसरकेँ माँगैत रहै मात्राक्रम : 212-222-2221-12 © कुन्दन कुमार कर्ण