सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विशेष

शुरू भेल 'मैथिली गजल पाठशाला'

मैथिली गजल प्रबर्धनके लेल 28 डिसेम्बर 2025 सँ 'मैथिली गजल पाठशाला' शुरू कएल गेल अछि । वाट्स ऐपपर शुरू भेल एहि पाठशालासँ मैथिली गजलमे नव गजलकार सभक प्रवेश हेतै से विश्वास लेल गेल अछि । पाठशालामे अभ्यर्थी सभक संख्या उत्साहजनक रूपमे निरन्तर बढि रहल छै । एखन धरि ६० सँ बेसी अभ्यर्थी सब सकृयतापूर्वक अभ्यास कऽ रहल छथि । पाठशालामे सहजकर्ताक रूपमे प्रशिक्षण कार्यमे आशीष अनचिनहार, कुन्दन कुमार कर्ण आ अभिलाष ठाकुर उल्लेखनीय काज कऽ रहल छथि । गजलमे नव आगन्तु सभक लेल मैथिली गजल नि:शुल्क सिखबाक सुअवसर अछि ई पाठशाला । पाठशालामे प्रत्येक दिन क्रमबद्ध तरिकासँ अभ्यास भऽ रहल छै आ अभ्यर्थी सभके प्रशिक्षक सभद्वारा प्रभावकारी पृष्ठपोषण प्रदान कएल जा रहल छै । जँ मैथिली गजल सिखबामे अहूँके रुची अछि त निच्चा देल QR स्कैन करि वा लिंकपर जा कऽ पाठशालामे सहभागी भऽ सकै छी । QR लिंक एहिपर क्लीक करि 'मैथिली गजल पाठशाला'सँ जुटू

बाल गजल

पापा यौ चकलेट खेबै कनिये नै भरिपेट खेबै छुछ्छे कोना नीक लगतै नमकिन बिस्कुट फेंट खेबै हमहीं टा नै एसगर यौ संगी सभके भेंट खेबै मानब एके टासँ नै हम पूरा दू प्याकेट खेबै कुन्दन भैया आबि जेथिन बांकी ओही डेट खेबै 222-221-22 © कुन्दन कुमार कर्ण

बाल गजल

बौआ हमर छै बुधिआर लोकक करै छै सत्कार ज्ञानी जकाँ कनिये टासँ माएसँ सिखलक संस्कार संगी बना ओ पोथीक मानै कलमके संसार खाना समयपर खेलासँ देखू बनल छै बौकार हँसिते रहल सदिखन खूब मुस्कान देलक उपहार कुन्दनसँ खेलाइत काल जितबाक केलक जोगार बहरे - मुन्सरह © कुन्दन कुमार कर्ण