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  1. नेताक भेषमें सभ कामचोर छैक
    तामससँ लोक देशक तेँ अघोर छैक

    चुल्हा गरीबके दिन राति छैक बन्द
    जे छैक भ्रष्ट घर ओकर इजोर छैक

    ककरा करत भरोसा आम लोक आब
    निच्चा अकान उप्पर घूसखोर छैक

    चाही विकास चाही नै विनाश आब
    जनताक ठोरपर मचिगेल शोर छैक

    आलोचना करत 'कुन्दन' कतेक आर
    जे चोर ओकरे मुँह एत जोर छैक

    मात्राक्रम : 221-212-221-2121

    © कुन्दन कुमार कर्ण

    © www.facebook.com/kundan.karna
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