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  1. दर्दसँ भरल गजल छी हम
    शोकसँ सजल महल छी हम

    सुख केर आशमे बैसल
    दुखमे खिलल कमल छी हम

    भितरी उदास रहितो बस
    बाहरसँ बनि हजल छी हम

    जिनगी कऽ बाटपर सदिखन
    सहि चोट नित चलल छी हम

    कुन्दन सुना रहल अछि ई
    संघर्षमे अटल छी हम

    मात्रा क्रम : 2212-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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