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  1. नेहक झूठ आश नै दिअ
    धरती बिनु अकाश नै दिअ

    हो अस्तित्व नै हमर जतऽ
    तेहन ठाम बास नै दिअ

    अनहारे रहत हमर हिय
    ई फुसिकेँ प्रकाश नै दिअ

    हम छी जाहिमे बसल नै
    से बेकार सांस नै दिअ

    नै चाही सिनेह एहन
    जिनगीमे हतास नै दिअ

    मात्रा क्रम : 2221-2122
    (मफऊलात–फाइलातुन)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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