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  1. प्रिय चलू संग एकातमे
    डुबि रहब मिठगर बातमे

    अनसहज नै बुझू लग हमर
    आउ बैसू हमर कातमे

    अछि बरसि रहल जे मेघ झुमि
    भीज जायब ग बरिसातमे

    गुन गुना लिअ गजल आइ जुनि
    संग मिलि केर सुर सातमे

    फेर एहन मिलत नै समय
    लिअ मजा प्रेमकेँ मातमे

    बहरे – मुतदारिक

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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