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  1. देह जखने पुरान बनल यौ
    स्थान तखने दलान बनल यौ

    आङ घटलै उमेर जँ बढलै
    देश दुनियाँ विरान बनल यौ

    सोह सुरता रहल कखनो नै
    आब नाजुक परान बनल यौ

    अस्त होइत सुरूज जकाँ बुझि
    राज सेहो अकान बनल यौ

    रीत छी याह जीवनकेँ सत
    सोचि कुन्दन हरान बनल यौ

    मात्राक्रम: 2122-121-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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