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  1. अप्पन हियसँ आइ हटा देलक ओ
    शोणित केर नोर कना देलक ओ

    हमरा बिनु रहल कखनो नै कहियो
    देखू आइ लगसँ भगा देलक ओ

    सपना जे सजैत रहै जिनगीकेँ
    सभटा पानिमे कऽ बहा देलक ओ

    हम बुझलौं गुलाब जँका जकरा नित
    से हमरे बताह बना देलक ओ

    भेटल नै इलाज कतौ कुन्दनकेँ
    एहन पैघ दर्द जगा देलक ओ

    मात्राक्रम: 2221-21-12222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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