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  1. बीतल दिन जखन मोन पडै छै
    आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै

    छोडब नै कहै संग अहाँकेँ
    लग नै आउ से आब कहै छै

    ओकर देलहा चोटसँ छाती
    एखन धरि हमर दर्द करै छै

    जिनगीमे लगा गेल पसाही
    धधरामे हिया कानि जरै छै

    के बूझत दुखक बात हियाकेँ
    कुन्दन आब कोना कँ रहै छै

    मात्राक्रम : 222-1221-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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