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  1. दुख अपने लग राखै छी
    सुख सभमे हम बाँटै छी

    सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन
    हँसि-हँसि जिनगी काटै छी

    पापसँ रहि अलगे बलगे
    धर्मक गीतल गाबै छी

    मैथिल छी सज्जन छी हम
    मिठगर बोली बाजै छी

    कुन्दन सन गुण अछि हमरा
    मिथिलाकेँ चमकाबै छी

    मात्राक्रम : 2222-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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