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  1. दर्द मोनक अहाँकेँ कहब हम कोना
    चोट नेहसँ भरल ई सहब हम कोना

    छोडि हमरा जखन दूर रहबै सजनी
    भावमे बिनु मिलनकेँ बहब हम कोना

    संग देबै अहाँ नै जँ सुख आ दुखमे
    एहि संसारमे यौ रहब हम कोना

    ठोरपर एसगर नव हँसीकेँ मोती
    दूर रहि–रहि विरहमे गहब हम कोना

    सोचि कुन्दन रहल जीविते जिनगी अछि
    अंचियापर अहाँ बिनु डहब हम कोना

    मात्रात्रम : 2122-122-12222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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