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  1. हियामे उमंगक अगबे लहर छै
    बुझा गेल ई त प्रेमक असर छै

    धरकि अछि रहल धरकन बड्ड जोरसँ
    रहल आब किछु नै बाँकी कसर छै

    मजा एहि जादूकेँ खूब अनुपम
    सजा मीठ सनकेँ जेना जहर छै

    गजल पर गजल कहलहुँ ओकरा पर
    मुदा बादमे बुझलहुँ बेबहर छै

    पहिल बेर कुन्दन ई बात जानल
    किए प्रेम सुच्चा जगमे अमर छै

    मात्राक्रम : 122-122-22-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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