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  1. कविता - जवानी

    Friday, November 28, 2014

    मोन हए छै
    अहाँकेँ जवानी
    बैँकमे राखि दी
    किएक त
    हम बूढ भ' जेबै
    तकर हमरा चिन्ता नै
    मुदा
    अहाँ जवाने रही
    से हमर अभिलाषा अछि

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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