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  1. गजल

    Saturday, January 3, 2015

    साँचमे शायद ओ नै चाहैत रहै
    मोन झुठ्ठे सदिखन पतिआबैत रहै

    फुलि हमर आगू ओ सुन्नर फूल जकाँ
    बाग पाछू अनकर गमकाबैत रहै

    हम हियामे बैसेलहुँ बुझि नेह अपन
    तेँ सदति हमरा ओ तड़पाबैत रहै

    साँच नेहक दुनियामे अछि मोल कहाँ
    लोक जैमे जिनगी बीताबैत रहै

    जाइ छल मन्दिर नित कुन्दन संग मुदा
    प्राथनामे दोसरकेँ माँगैत रहै

    मात्राक्रम : 212-222-2221-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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