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  1. सम्पूर्ण भूकम्प पीड़ित आ एहि कारणे अपना सभक बीचसँ गुजरलप्रति श्रद्धाञ्लीस्वरूप समर्पित ई गजल

    जै ठाँ छल काइल नित जिनगीक मुस्कान
    तै ठाँ बस नोरक रहि गेलै किए स्थान

    हे ईश्वर ई केहन खेल प्रकृति केर
    लोकक घर जेना अछि बनि गेल शमसान

    गजलक अक्षर-अक्षर कानैत अछि आब
    कहि धरती कोना यौ बनि गेल बइमान

    कहियो सुन्नरता जै देशक रहल शान
    छन भरिमे सभ ओ मेटा गेल पहचान

    आशा मोनक कुन्दन अछि जीविते मोर
    उगबे करतै जिनगीमे एक दिन चान

    मात्राक्रम : 222-222-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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