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  1. गजल

    Thursday, August 27, 2015

    ओकर यादक आइ फेरो विर्रो उठल हियामे
    उडिया गेलौं हम बिहारि प्रेमक बहल हियामे

    जादू मौसमकेँ असर केलक मोन पर हमर जे
    आस्ते–आस्ते दर्द मिठगर नेहक बढल हियामे

    अन्चोकेमे चान दिस ई चंचल नजरि कि गेलै
    छल पूनमकेँ राति सूरत ओकर सजल हियामे

    जा धरि ठठरी ठार रहतै मरिते रहब अहाँपर
    खाइत शप्पत हम कहै छी प्रिय ई गजल हियामे

    मोनक सेहन्ता हमर छल ललका गुलाब कुन्दन
    ककरा सभ किछु भेटलै ऐठाँ जे रहल हियामे

    मात्राक्रम : 2222-2122-2212-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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