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  1. बाल गजल

    Thursday, May 19, 2016

    फूल पर बैस खेलै छै टिकली
    डारि पर खूब कूदै छै टिकली
    Picture - www.google.com

    भोर आ साँझ नित दिन बारीमे
    गीत गाबैत आबै छै टिकली

    लाल हरिअर अनेको रंगक सभ
    देखमे नीक लागै छै टिकली

    पाँखि फहराक देखू जे उडि-उडि
    दूर हमरासँ भागै छै टिकली

    नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया
    आब जेनाक नाचै छै टिकली

    मात्रक्रम : 212-2122-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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