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  1. हम नै आलोचक छी । नै समालोचक छी । आ हुनका सभहँक जागिर सेहो छिनऽ नै चाहै छी । तथापि एकटा सर्जककेँ हिसाबसँ मैथिल साहित्यक चर्चित नाऔं सियाराम झा 'सरस' जीक लिखल गजल संग्रहपर संक्षेपमे आइ किछु चर्चा करऽ चाहब ।

    तँ पहिने सरला प्रकाशनद्वारा सन् 1989 मे प्रकाशित कएल गेलह हुनक गजल संग्रह "शोणितायल पैरक निशान"के देखि-

    एहि संग्रहमे कुल ४८टा गजल छै । जकरा आजाद गजलक श्रेणीमे राखि पढल जा सकैछ । किछु गजल भावक दृष्टिकोणे तँ महत्वपूर्ण छहिए किछु शेर सेहो हृदयकेँ छूअवला छै । जेना बतीसम् गजलक ई मतला देखू-

    फूलवन मे एक भँवरा युग युग सँ रहए पियासल
    जनु भोजक खास भडारी रहि जाय निखण्ड उपासल

    पोथीमे 'गजले किएक ?' विषयपर 6 पेज खर्च कए लिखल गेल छै मुदा 'गजले किएक ?' तकर तथ्यपरक तर्क नै भेट सकल ।

    बहरक निर्वहन तँ दूरक बात संग्रहक अधिकांश गजलमे गजलक आधारभुत निअम पालन नै कएल गेल छै । जेना गजल संख्या 2, 3, 8, 11, 14, 15, 18, 21, 23, 24, 25, 26, 27, 30, 35, 36, 45, 46, 47, 48 लगायतके गलजमे काफिया दोष तँ छहिए, बहुत रास गजलमे काफिया आ रदिफक ठेकान नै । ढेर रास शेरकेँ अर्थ सेहो अस्पष्ट बुझाइत । जेना तीसम् गजलक ई मतला देखू-

    भूमि डोलल तँ बहुत किछु डोलल
    भूमि डोलल तँ कहाँ किछू डोलल

    कहब कने नीक नै लागत मुदा गजलक नामपर गजलक मजाक उडाएल जकाँ बुझाएत । तखन एकरा गजल संग्रह कहनाइपर प्रश्नचिन्ह लागि रहल छै । संगे शाइर गजलक विविध पक्षक सम्बन्धमे अनभिज्ञ रहल बात उजागर होइ छै ।

    तेनाहिते नव आरम्भ प्रकाशनद्वरा सन् 2008 मे प्रकाशित हुनके गजल संग्रह 'थोडे आगि थोडे पानि'मे सेहो एहने गल्ती सभ दोहराएल भेटत ।
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