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  1. Saturday, May 27, 2017


    बाग नै पूरा बस एक टा गुलाब चाही
    हो भरल नेहक खिस्सासँ से किताब चाही

    लोक जिनगी कोना एसगर बिता दए छै
    एक संगीके हमरा तँ संग आब चाही

    दर्दमे सेहो मातल हिया रहै निशामे
    साँझ पडिते बोतलमे भरल शराब चाही

    मोनमे मारै हिलकोर किछु सवाल नेहक
    वास्तविक अनुभूतिसँ मोनके जवाब चाही

    सोचमे ओकर कुन्दन समय जतेक बीतल 
    आइ छन-छनके हमरा तकर हिसाब चाही

    2122-2221-212-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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