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  1. गजल

    Tuesday, June 27, 2017

    ई प्रेम हमरा जोगी बना देलक
    विरहक महलके शोगी बना देलक

    उपचार नै भेटल यौ कतौ एकर
    गम्भीर मोनक रोगी बना देलक

    मारै करेजामे याद टिस ओकर
    दिन राति दर्दक भोगी बना देलक

    संयोग जेना कोनो समयके छल
    तँइ जोडि दू हिय योगी बना देलक

    प्रेमक पुजगरी जहियासँ बनलौ हम
    संसार कुन्दन ढोगी बना देलक

    221-2222-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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