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  1. गजल

    Friday, August 18, 2017

    बढलै देश-देश बीच हथियारक प्रतिस्पर्धा
    राष्ट्रियताक नाम पर अहंकारक प्रतिस्पर्धा

    मानवताक गप्प लोक कतबो करै जमानामे
    देखल बेवहारमे तिरस्कारक प्रतिस्पर्धा

    पेन्टागनसँ कोरिया सहनशीलता कतौ नै अछि
    मिसियो बात लेल भेल ललकारक प्रतिस्पर्धा

    साहित्यिक समाजमे चलल राजनीति सम्मानक
    लेखन पर धिआन नै पुरस्कारक प्रतिस्पर्धा

    धरती एक टा अकास एके समान छै कुन्दन
    भरि मुट्ठीक माटि लेल सरकारक प्रतिस्पर्धा

    2221-2121-2212-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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